SANSKAR

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-618-1

Author:VISHNU PRABHAKAR

Pages:100


MRP : Rs. 200/-

Stock:Out of Stock

Rs. 200/-

Details

संस्कार

Additional Information

इस औपन्ययासिक कृति की कथा है नारी के उत्तरोत्तर विकास की-नारी-मुक्ति का स्वप्न देखती, अपनी सास के चक्रव्यूह में फँसी नारी की; सब कुछ भाग्य पर छोड़कर, जीवन को घसीटती नारी की, जिसकी मज्जा में संस्कार कानखजूरे की तरह जड़ जमाकर बैठ जाते हैं; ऐसी सशक्त कर्ममयी नारी की जो अपने व्यक्तित्व का स्वतन्त्र निर्माण करे और अपने को वह दिखाने की चेष्टा न करे जो वह नहीं है, जो किसी भी स्थिति में किसी शर्त पर समझौता न करे। नारी-मुक्ति का स्वप्न साकार हो, जीवन के संघर्षों के तूफ़ानों से जूझने की शक्ति का संचार हो, ऐसी अदम्य इच्छा-शक्तिवाली नारी का सृजन हो जो मुक्ति की चाह में पुरुष बनने की कामना से अपने को बचा सके-यही इस औपन्यासिक कृति का सन्देश है।

About the writer

VISHNU PRABHAKAR

VISHNU PRABHAKAR अपने साहित्य में भारतीय वाग्मिता और अस्मिता को व्यंजित करने के लिये प्रसिद्ध रहे श्री विष्णु प्रभाकर का जन्म 21 जून सन् 1912 को मीरापुर, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा पंजाब में हुई। उन्होंने सन् 1929 में चंदूलाल एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल, हिसार से मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात् नौकरी करते हुए पंजाब विश्वविद्यालय से भूषण, प्राज्ञ, विशारद, प्रभाकर आदि की हिंदी-संस्कृत परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से ही बी.ए. भी किया। विष्णु प्रभाकर जी ने कहानी, उपन्यास, नाटक, जीवनी, निबंध, एकांकी, यात्रा-वृत्तांत और कविता आदि प्रमुख विधाओं में लगभग सौ कृतियाँ हिंदी को दीं। उनकी ‘आवारा मसीहा’ सर्वाधिक चर्चित जीवनी है, जिस पर उन्हें ‘पाब्लो नेरूदा सम्मान’, ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’ सदृश अनेक देशी-विदेशी पुरस्कार मिले। प्रसिद्ध नाटक ‘सत्ता के आर-पार’ पर उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा ‘मूर्तिदेवी पुरस्कार’ मिला तथा हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वार ‘शलाका सम्मान’ भी। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के ‘गांधी पुरस्कार’ तथा राजभाषा विभाग, बिहार के ‘डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शिखर सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया। विष्णु प्रव्हाकर जी आकाशवाणी, दूरदर्शन, पत्र-पत्रिकाओं तथा प्रकाशन संबंधी मीडिया के विविध क्षेत्रों में पर्याप्त लोकप्रिय रहे। देश-विदेश की अनेक यात्राएँ करने वाले विष्णु जी जीवन पर्यंत पूर्णकालिक मसिजीवी रचनाकार के रूप में साहित्य-साधनारत रहे। 11 अप्रैल सन् 2009 को दिल्ली में विष्णु जी इस संसार से विदा ले गये।

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