CINEMA KE CHAAR ADHYAY

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-614-3

Author:DR. T. SHASHIDHARAN

Pages:100


MRP : Rs. 250/-

Stock:Out of Stock

Rs. 250/-

Details

सिनेमा के चार अध्याय

Additional Information

वर्तमान युग में सिनेमा एक स्वतन्त्र और नवीन कला के रूप में मनोरंजन का सर्वाधिक सुलभ साधन सिद्ध हुआ है। यह ज्ञानवर्द्धन के लिए भी अत्यन्त बेहतरीन माध्यम है। सिनेमा अपने कलेवर में विभिन्न कलाओं को समेटने वाली एक ऐसी स्वतन्त्र यांत्रिक कला है, जो जीवन के सम-विषम रूपों और भावों को नवीन कला-शिल्प के रूप में सजीव और मार्मिक अभिव्यक्ति प्रदान करने की शक्ति रखती है। सिनेमा की उपस्थिति जादुई है। इसमें वे सभी गुण विद्यमान हैं जो किसी एक श्रेष्ठ और प्रौढ़ कला में निहित होते हैं। लेकिन इन गुणों को सहज-स्वाभाविक और सजीव अभिव्यक्ति देने के लिए मौलिक प्रतिभा की आवश्यकता होती है। ऐसे कुछ प्रतिभाशालियों का समीपस्थ दृश्य (close up) इस किताब में है। साथ ही विश्व-सिनेमा से लेकर प्रादेशिक-सिनेमा तक की यात्रा के कुछ शब्दचित्र भी प्रस्तुत हैं। हिन्दी में सिनेमा अध्ययन की अकादमिक परम्परा नहीं के बराबर है। सिनेमाई छात्रों के लिए बुनियादी जानकारी देना ही इस किताब का लक्ष्य है।

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DR. T. SHASHIDHARAN

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