KISHKINDHA

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-569-9

Author:NARENDRA KOHLI

Pages:120


MRP : Rs. 100/-

Stock:In Stock

Rs. 100/-

Details

किष्किंधा

Additional Information

किष्किंधा नरेन्द्र कोहली के रामकथाधृत उपन्यास 'अभ्युदय' के एक अंश पर आधृत नाटक है। इसका घटनास्थल किष्किधा है और दो-एक साधारण काल्पनिक पात्रों के सिवाय सारे पात्र भी रामकथा के परंपरागत और परिचित पात्र हैं। फिर भी यह नाटक आपके अपने युग की गंभीर समसामयिक समस्याओं से परिपूर्ण विचारोत्तेजक नाटक है। जब शासक के लिए किसी ओर से कोई चुनौती नहीं रह जाती और वह स्वयं को पूर्णतः सुरक्षित पाता है तो अहंकारी ही नहीं हो जाता, यह भी भूल जाता है कि शासक उसके विलास के लिए नहीं-प्रजा के हित के लिए होता है। ऐसा अधिनायक कैसे सत्ता का अपने प्राणों के साथ तादात्म्य कर लेता है और सत्ता के अभाव में जीवित भी नहीं रह सकता, यह आप इस नाटक में देखेंगे। राजनीति मानवता के विकास, उत्थान तथा कल्याण का यंत्र भी है और सारे के सारे राष्ट को अपने स्वार्थ के लिए बेच देने का उपकरण भी। जनता सचेत और जागरूक हो तो राजनीति उसके विकास की सीढ़ी है; और जनता अचेत और अक्षम हो तो राजनीति उसके लिए अंधकूप है।... इन तथ्यों को पहचाना रंगकर्मी ज़फ़र संजरी ने। उन्हें लगा कि नरेन्द्र कोहली के उपन्यास में यह नाटक छिपा पड़ा है, उसे उपन्यास से पृथक् होकर एक स्वतंत्र नाटक के रूप में पाठकों, रंगकर्मियों और दर्शकों के सम्मुख आना चाहिए। अतः उन्होंने यह नाटक तैयार किया। हमें विश्वास है कि न केवल यह नाटक आपको आंदोलित करेगा, रंगकर्मियों को उत्साहित करेगा वरन् हिंदी के नाट्य-साहित्य को निश्चित रूप से समृद्ध भी करेगा।

About the writer

NARENDRA KOHLI

NARENDRA KOHLI नाम: नरेन्द्र कोहली जन्म: 6 जनवरी 1940। कालजयी कथाकार एवं मनीषी पद्मश्री अलंकृत डॉ. नरेन्द्र कोहली की गणना आधुनिक हिन्दी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों में होती है। कोहली जी ने साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं (उपन्यास व्यंग्य नाटक कहानी) एवं गौण विधाओं (संस्मरण निबन्ध पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलाई। हिन्दी साहित्य में ‘महाकाव्यात्मक उपन्यास की विधा को प्रारम्भ करने का श्रेय नरेन्द्र कोहली को ही जाता है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक समाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना नरेन्द्र कोहली की अन्यतम विशेषता है। नरेन्द्र कोहली सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है। वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित कोहली जी की रचनाएँ: अभ्युदय (दो भाग), महासमर 1: बन्धन, महासमर 2: अधिकार, महासमर 3: कर्म, महासमर 4: धर्म, महासमर 5: अन्तराल, महासमर 6: प्रच्छन्न, महासमर 7: प्रत्यक्ष, महासमर 8: निर्बन्ध, महासमर (रजत संस्करण-9 खण्डों में), महासमर (विशेष संस्करण-9 खण्डों में ही उपलब्ध), सैरन्ध्री, न भूतो न भविष्यति (व्यास सम्मान 2013), मत्स्यगन्धा, हिडिम्बा, कुन्ती, शिखण्डी, सुभद्रा (उपन्यास), मेरे राम: मेरी रामकथा, पुनरारम्भ, अवसर, दीक्षा, संघर्ष की ओर, युद्ध (दो भाग), देश के हित में, सागर-मन्थन (उपन्यास); हम सबका घर (बाल उपन्यास); समग्र कहानियाँ (दो भाग); व्यंग्य गाथा (दो भाग), मुहल्ला, वह कहाँ है, सबसे बड़ा सत्य, हुए मर के हम जो रुसवा, नामचर्चा, देश के शुभचिन्तक, त्राहि त्राहि, इश्क़ एक शहर का, राम लुभाया कहता है, आयोग, सपने में आये तीन परिवार, गणतन्त्र का गणित, किसे जगाऊँ, प्रतिनाद, स्मरामि (व्यंग्य); किष्किंधा, अगस्त्य कथा (नाटक); हिन्दी उपन्यास: सृजन और सिद्धान्त, प्रेमचन्द (आलोचना); जहाँ है धर्म वहीं है जय, नरेन्द्र कोहली ने कहा (विचार-लेख), Bondage : Story of Bhishma, The Return। सम्मान: पद्मश्री सम्मान व्यास सम्मान शलाका सम्मान पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान अट्टहास सम्मान। निधन : 17 अप्रैल 2021।

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