DHOOL PAUDHON PER

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-965-9

Author:DR. GOVIND MISHRA

Pages:156


MRP : Rs. 325/-

Stock:In Stock

Rs. 325/-

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धूल पौधों पर

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यह उपन्यास संसार में जो यों ही कहीं टपका दी गयी, कोरे काग़ज़ पर एक अकेली बूँद... “मुझे लगता है मैं एक बंजारिन हूँ जो एक अदद घर के लिए कब से भटक रही है...” उस लड़की की संघर्ष गाथा। “तुम्हें क्या चाहिए आदमी में?" "उसका मन आपके मन जैसा सुन्दर हो...” “वह सामने के मँझोले क़द वाले एक पुराने झाड़ को देखने लगी। पतली डालियों वाला, गोल-गोल काटा गया, तराशा हुआ वह एक आदमकद झाड़ था, तारों में क़ैद... समय-समय पर इधर-उधर से काटते-छाँटते हुए जिसे एक आनुपातिक पर गोलाई में ढाल दिया गया था। झाड़ की पत्तियों पर धूल थी जिसके कारण एक बासीपन उससे उठता था। एक चिड़िया डगालों के भीतर ऊपर-नीचे, इधर-उधर चींची करते हुए हो रही थी..." प्रेमकथा...वे दो जिनमें एक जैसा कुछ नहीं, उम्र भी नहीं। हमारी शिक्षा व्यवस्था के कीचड़ का यथार्थ। धर्म दुकानें। परिवार के रास्ते भारतीय समाज की जकड़न – “वह कहता है-सपने मत देखो। समाज जिसे जीवन में हासिल नहीं होने देता, उसके सपने भी नहीं देखने देगा? सपने तो देखने दो भाई! " यह सब...या इनके भी पार, हाहाकार“- देखते देखते वह कुछ और हो जाती-आँखें क्या, पूरा चेहरा ही सूजा हुआ...सपाट। कुछ बोलती नहीं, बस सूनी-सूनी आँखों से कहीं भी देखती हुई...एकदम ब्लैंक, जैसे पूरा शरीर ही निचुड़ गया हो। उसकी आवाज़ बदल जाती-बहुत भीतर के किसी गहर से निकलती गीली-गीली भारी आवाज, फटी हुई...जैसे वह किसी और की थी। प्रेमप्रकाश को लगता जैसे कोई प्रेत उसके भीतर घुस गया और सुख की स्थिति से उसे बलात खींचता हुआ फिर से अवसाद में ले जाकर पटके दे रहा हो। ऐसे में वह अपने सुख की चीज़ों को भी बिथेड़ती हुई, अपने हितैषियों को भी लात मारती हुई ख़ुद को विषाद के तल पर ला पटकती...” ये मनुष्य हैं कि पौधे, जिन पर कैसे भी धूल आ बिछी!

About the writer

DR. GOVIND MISHRA

DR. GOVIND MISHRA "जन्म : 1 अगस्त 1939, अतर्रा, बांदा, (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिन्दी,अंग्रेजी विधाएँ : उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तान्त, साहित्यिक निबंध, बाल साहित्य, कविता मुख्य कृतियाँ उपन्यास : वह अपना चेहरा, उतरती हुई धूप, लाल पीली जमीन, हुजूर दरबार, तुम्हारी रोशनी में, धीर समीरे, पाँच आंगनों वाला घर, फूल ... इमारतें और बन्दर, कोहरे में कैद रंग, धूल पौधों पर कहानी संग्रह : नए पुराने माँ-बाप, अंत:पुर, धांसू, रगड़ खाती आत्महत्यायें, मेरी प्रिय कहानियाँ, अपाहिज, खुद के खिलाफ, खाक इतिहास, पगला बाबा, आसमान कितना नीला, स्थितियाँ रेखांकित, हवाबाज, मुझे बाहर निकालो यात्रा वृत्तान्त : धुंध भरी सुर्खी, दरख्तों के पार ... शाम, झूलती जड़ें, परतों के बीच, और यात्राएं .... साहित्यिक निबंध : साहित्य का संदर्भ, कथा भूमि, संवाद अनायास, समय और सर्जना बाल साहित्य : कवि के घर में चोर-राधाकृष्ण प्रकाशन, मास्टर मन्सुखराम, आदमी का जानवर, ओ प्रकृति माँ"

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