MAANAK HINDI

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-809-6

Author:BRIJ MOHAN

Pages:168


MRP : Rs. 395/-

Stock:In Stock

Rs. 395/-

Details

मानक हिन्दी

Additional Information

यह कोई पाठ्य-पुस्तक नहीं है। अतः इसमें किसी भी परीक्षा के पाठ्य-क्रम का समावेश नहीं किया गया है। इसमें बहुत से विस्तृत ब्यौरे नहीं दिये गये हैं जो सामान्यतः पाठ्य-पुस्तकों में दिये जाते हैं। न इसमें व्याकरण की सूक्ष्मताएँ दिखाई गयी हैं। मैंने इसे यथासाध्य व्याकरण के झंझटों से दूर ही रखा है। अतएव इसमें तकनीकी शब्दों का प्रायः अभाव है। यह पुस्तक सामान्य पाठकोंऔर उदीयमान लेखकों को दृष्टि में रखकर लिखी गयी है। जितने प्रकार की भूलें हिन्दी के लेखक किया करते हैं इसमें उनका संकलन करने का प्रयत्न किया गया है। ऐसी भूलों की जितनी बड़ी सूची मेरे पास संगृहीत है, उसकी चौथाई भी इसमें समाविष्ट नहीं हो सकी है। केवल हर प्रकार की दो-दो, तीन-तीन भूलें दे दी गयी हैं। भूलों का कलन अधिकतर पुस्तकों से किया गया है क्योंकि समाचारपत्रों में जो लेख आदि दिये जाते हैं, उनमें तो लेखक जल्दी के कारण प्रमाद कर जाते हैं, किन्तु पुस्तकों में तो लिखते समय अधिक सावधानी बरती जाती है। अतएव, यह पुस्तक नये और पुराने सभी प्रकार के लेखकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। इसके अतिरिक्त परीक्षार्थियों के लिए सहायक पुस्तक का काम भी देगी।

About the writer

BRIJ MOHAN

BRIJ MOHAN ब्रजमोहन गणितज्ञ होते हुए भी हिन्दी भाषा और उसके व्याकरण के विकास में सक्रिय योगदान के लिए समादृत विद्वान। स्कूली शिक्षा मुरादाबाद (उ.प्र.) में। एम.ए., एलएल.बी. करने के बाद सन् 1934 में इंगलैंड से पीएच.डी. की उपाधि। तत्पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति। वहीं, हिन्दी भाषा और व्याकरण पर कार्य करने का संकल्प और उसे पूरा करने की दिशा में लगातार अध्यवसाय। हिन्दी की विशिष्ट सेवा के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय पुरस्कार से सम्मानित। सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में गणित विभाग के अध्यक्ष और फिर प्राचार्य रहे। वर्ष 1990 में देहावसान। प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ : गणितीय कोश, गणित का इतिहास, अर्थ-विज्ञान, अवकलन गणित, मायावर्ग, चिह्न विज्ञान : उत्पादन और सांस्कृतिक संदर्भ, हिन्दी की प्रकृति और शुद्ध प्रयोग, विशेषण प्रयोग, किस्सा : एक से एक, भाषा और व्यवहार, सरल गणित-ज्यामिति, शुद्ध गणित की पाठचर्चा, रूपान्तर कलन, अंग्रेज़ी-हिन्दी वैज्ञानिक कोश (खंड : 1-2), नागरी लिपि : रूप और सुधार, शब्द-चर्चा, मानक हिन्दी आदि।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality