DESH-VIDESH KI 110 BODHKATHAYEN

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-818-5

Author:PATRICK LEVY

Pages:235


MRP : Rs. 195/-

Stock:In Stock

Rs. 195/-

Details

देश-विदेश की ११० बोधकथाएँ

Additional Information

हम सबकी कामना होती है कि हम प्रज्ञावान या अधिक प्रज्ञावान हों, परन्तु प्रज्ञा है क्या? बोधकथाओं की परम्परा स्मृति जितनी ही पुरानी है। सम्भवतः यह वाणी जितनी प्राचीन और पृथ्वी पर मानवता जितनी ही व्यापक है। बोधकथा में आवश्यक नहीं होता कि नैतिक-मूल्यों अथवा सदाचार के चित्रण का प्रयास हो। अपितु यह तो अनैतिक, मूर्तिभंजक अथवा ईश-निन्दाजनक होने का आभास दे सकती है। ये परीकथा, आख्यान (सेबल) या पौराणिक कथा (मिथ) से भिन्न होती है क्योंकि इसका अन्त चत्मकार में नहीं होता। प्रज्ञा उन अनपेक्षित परिप्रेक्ष्यों और समाधानों में प्रकट होती है जो आत्मा, हृदय और बुद्धि को एक साथ प्रेरित करते हैं। इसमें प्रयास होता है ज्ञानवर्द्धक प्रभाव का जो उद्भूत होता है साधु की स्वच्छदर्शिता से; उसकी प्रतिक्रिया की निर्भीकता से, उसके प्रदर्शित सत्य की शक्ति से अथवा उसके सुझाये समाधानों से उत्पन्न सौम्यता से। देश-विदेश की परम्पराओं, साधुओं के जीवन-वृत्त और अपने स्वयं के अवलोकन से प्रेरित एक सौ से अधिक इन कथाओं के माध्यम से, पैट्रिक लेवी ने इस महत्त्वपूर्ण मानवीण गुण अर्थात प्रज्ञा के विभिन्न रूपों का अनुशीलन किया है।

About the writer

PATRICK LEVY

PATRICK LEVY Patrick Levy is a French writer who lives six months a year in India, his second mother, as he likes to say. He has travelled the world in search of spiritual masters and experiences, and has practiced Kabala, Sufism, Buddhism and Vedanta, and published books about his explorations.

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