ISHQ EK SHAHAR KA

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-586-8

Author:NARENDRA KOHLI

Pages:346


MRP : Rs. 695/-

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Rs. 695/-

Details

इश्क एक शहर का.

Additional Information

कहानीकार नरेन्द्र कोहली ने 1995 ई. में व्यंग्य लिखना आरम्भ किया तो वे व्यंग्यकार ही हो गये। पहला संकलन ‘एक और लाल तिकोन' 1970 ई. में आया। था तो प्रथम संग्रह, किन्तु व्यंग्य में पर्याप्त प्रौढ़ता थी। 1972 ई. में 'पाँच एब्सर्ड उपन्यास' के प्रकाशन के साथ ही यह अनुभव किया गया कि हिन्दी में व्यंग्य-लेखन के नये आयाम उद्घाटित हुए हैं। यह शिल्प अभूतपूर्व था। कार्टून शैली में लिखी गयी औपन्यासिक रचनाएँ। उपमाएँ और रूपक मौलिक थे और जीवन की तर्कहीनता अपने नग्न रूप में पाठक के सम्मुख थी। एक व्यंग्यकार की दृष्टि से अपनी समग्रता में देखा गया समाज। 1973 में 'आश्रितों का विद्रोह' का प्रकाशन हुआ। यह उपन्यास के शिल्प में लिखा गया व्यंग्य था। महानगर दिल्ली के जीवन की अपनी आवश्यकताओं-राशन, दूध, यातायात इत्यादि के लिए जूझने की एक फंतासीय कथा। इसमें समाज का वर्तमान भी था और भविष्य भी। उसमें उसकी दुर्दशा भी चित्रित हुई थी और उससे मुक्त होने के मार्ग का संकेत भी था। स्वाधीनता और आत्मनिर्भरता का सन्देश देनेवाला यह अद्भुत उपन्यास अपने प्रकार की एक ही रचना है। 1973 ई. में ही आया 'जगाने का अपराध' । यहाँ व्यंग्य कुछ और तीखा और धारदार हो गया है। सामाजिक चेतना कुछ अधिक उभर कर आयी है। 1975 ई. में पौराणिक प्रसंग पर आधृत आधुनिक जीवन सम्बन्धी व्यंग्य नाटक 'शंबूक की हत्या' प्रकाशित हुआ, जिसमें राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था को उधेड़कर, उसमें बहुत गहरे झाँका गया है। 1978 ई. में 'आधुनिक लड़की की पीड़ा', 1982 ई. में 'त्रासदियाँ' और 1986 ई. में परेशानियाँ' व्यंग्य संकलन प्रकाशित हुए। इसमें नये विषयों पर तीव्र व्यंग्यात्मक शैली में अपने समसामयिक समाज का विश्लेषण किया गया है। दस वर्षों के अन्तराल के पश्चात् 1996 ई. में 'आत्मा की पवित्रता' आया और 1997 ई. में 'गणतन्त्र का गणित'। इन बत्तीस वर्षों में नरेन्द्र कोहली ने कभी व्यंग्य की अवहेलना नहीं की। समय के साथ उनका व्यंग्य और प्रखर और पैना हुआ। 'अट्टहास' और 'चकल्लस' पुरस्कारों से सम्मानित नरेन्द्र कोहली के व्यंग्य लेखन में पिछले दिनों राजनीति का रंग कुछ गहरा हुआ है। वे दूसरों की बनाई रूढ़ सीमाओं में बँध कर, फैशनेबल नारों को ध्यान में रखकर, रचना नहीं करते, न ही वे साहित्यिक रूढ़िवादियों की मान्यता और स्वीकृति की चिन्ता करते हैं। इसलिए वे उन विसंगतियों पर भी लिखते हैं, जिन्हें लोगों ने देखा और भोगा तो है, किन्तु जिसके विषय में लिखने का साहस वे नहीं कर पाते।

About the writer

NARENDRA KOHLI

NARENDRA KOHLI नाम: नरेन्द्र कोहली जन्म: 6 जनवरी 1940। कालजयी कथाकार एवं मनीषी पद्मश्री अलंकृत डॉ. नरेन्द्र कोहली की गणना आधुनिक हिन्दी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों में होती है। कोहली जी ने साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं (उपन्यास व्यंग्य नाटक कहानी) एवं गौण विधाओं (संस्मरण निबन्ध पत्र आदि) और आलोचनात्मक साहित्य में अपनी लेखनी चलाई। हिन्दी साहित्य में ‘महाकाव्यात्मक उपन्यास की विधा को प्रारम्भ करने का श्रेय नरेन्द्र कोहली को ही जाता है। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक समाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना नरेन्द्र कोहली की अन्यतम विशेषता है। नरेन्द्र कोहली सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है। वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित कोहली जी की रचनाएँ: अभ्युदय (दो भाग), महासमर 1: बन्धन, महासमर 2: अधिकार, महासमर 3: कर्म, महासमर 4: धर्म, महासमर 5: अन्तराल, महासमर 6: प्रच्छन्न, महासमर 7: प्रत्यक्ष, महासमर 8: निर्बन्ध, महासमर (रजत संस्करण-9 खण्डों में), महासमर (विशेष संस्करण-9 खण्डों में ही उपलब्ध), सैरन्ध्री, न भूतो न भविष्यति (व्यास सम्मान 2013), मत्स्यगन्धा, हिडिम्बा, कुन्ती, शिखण्डी, सुभद्रा (उपन्यास), मेरे राम: मेरी रामकथा, पुनरारम्भ, अवसर, दीक्षा, संघर्ष की ओर, युद्ध (दो भाग), देश के हित में, सागर-मन्थन (उपन्यास); हम सबका घर (बाल उपन्यास); समग्र कहानियाँ (दो भाग); व्यंग्य गाथा (दो भाग), मुहल्ला, वह कहाँ है, सबसे बड़ा सत्य, हुए मर के हम जो रुसवा, नामचर्चा, देश के शुभचिन्तक, त्राहि त्राहि, इश्क़ एक शहर का, राम लुभाया कहता है, आयोग, सपने में आये तीन परिवार, गणतन्त्र का गणित, किसे जगाऊँ, प्रतिनाद, स्मरामि (व्यंग्य); किष्किंधा, अगस्त्य कथा (नाटक); हिन्दी उपन्यास: सृजन और सिद्धान्त, प्रेमचन्द (आलोचना); जहाँ है धर्म वहीं है जय, नरेन्द्र कोहली ने कहा (विचार-लेख), Bondage : Story of Bhishma, The Return। सम्मान: पद्मश्री सम्मान व्यास सम्मान शलाका सम्मान पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान अट्टहास सम्मान। निधन : 17 अप्रैल 2021।

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