NIMANTRAN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-235-3

Author:TASLIMA NASRIN

Pages:120


MRP : Rs. 200/-

Stock:In Stock

Rs. 200/-

Details

निमन्त्रण.

Additional Information

'निमन्त्रण' उपन्यास सन् '92 में लिखा गया था। उन दिनों उपन्यास लिखने की न मुझे आदत थी, न तजरुबा। (इसका मतलब यह नहीं कि आज मैं सीख गयी हूँ या मुझे तज़रुबा हो गया है)! मैं तो कविताएँ और कलाम लिखने वाली औरत हूँ। उन दिनों तीन दिनों में कोई एक उपन्यास लिख डालने के लिए, प्रकाशक दबाव डालते रहते थे। मेरी तो कैसी भयंकर करुण हालत होती थी, क्या बताऊँ! प्रस्तुत कृति न लम्बी कहानी बन पायी है, न उपन्यास । मैं चाहती थी कि किसी दिन 'निमन्त्रण' फिर से लिखें। इसे और बड़ा और विस्तृत रूप दूँ, इसे सच ही उपन्यास का रूप दूँ। लेकिन नहीं, वह दिन आज भी नहीं आया। आख़िरकार, बांग्लादेश में कच्चे हाथों का कच्चा लेखन पश्चिम बंगाल और समूचे भारत में भी ले आयी। मेरा गोपन, कुछ भी नहीं है। चलो कोई बात नहीं, मेरी कुछेक भूल-त्रुटियाँ, पाठकों की निगाहों । पकड़ी जायें। भूल नज़र आयें, तो भी कोई बात नहीं। लेकिन इसके पीछे जो ईमानदार चाह मौजूद है, औरतों की तकलीफ़ों समझने-समझाने की जो अति अकुलाहट है, जो रुलाई छिपी हुई है उसका अगर लेशमात्र भी पाठकों को एहसास हो जाये, तो मेरा प्रयास सार्थक होगा। अगर सारा-का-सारा मामला अर्थहीन हो जाये, तो भी क्या किया जाये? हम कितना कुछ तो अर्थहीन, बेमतलब ही करते हैं। अपने आस-पास हमारी भूल-चूक बिख़री रहती है और हम उन्हें भूल भी जाते हैं। ज़िन्दगी की छोटी-मोटी भूल-चूक मैं बेहद बड़ा करके, देखती भी नहीं। पाठकों को मेरी श्रद्धा और प्यार! पुस्तक मेला, 2008 कोलकाता तसलीमा नसरीन

About the writer

TASLIMA NASRIN

TASLIMA NASRIN तसलीमा नसरीन ने अनगिनत पुरस्कार और सम्मान अर्जित किए हैं, जिनमें शामिल हैं - मुक्त चिन्तन के लिए यूरोपीय संसद द्वारा प्रदत्त - सखारव पुरस्कार; सहिष्णुता और शान्ति प्रचार के लिए यूनेस्को पुरस्कार; फ्रांस सरकार द्वारा मानवाधिकार पुरस्कार; धाखमक आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए फ्रांस का ‘एडिट द नान्त पुरस्कार’; स्वीडन लेखक संघ का टूखोलस्की पुरस्कार; जर्मनी की मानववादी संस्था का अर्विन फिशर पुरस्कार; संयुक्त राष्ट्र का फ्रीडम फ़्राम रिलिजन फाउण्डेशन से फ्री थॉट हीरोइन पुरस्कार और बेल्जियम के मेंट विश्वविद्यालय से सम्मानित डॉक्टरेट! वे अमेरिका की ह्युमैनिस्ट अकादमी की ह्युमैनिस्ट लॉरिएट हैं। भारत में दो बार, अपने ‘निर्वाचित कलाम’ और ‘मेरे बचपन के दिन’ के लिए वे ‘आनन्द पुरस्कार’ से सम्मानित। तसलीमा की पुस्तकें अंग्रेजी, फ्रेंच, इतालवी, स्पैनिश, जर्मन समेत दुनिया की तीस भाषाओं में अनूदित हुई हैं। मानववाद, मानवाधिकार, नारी-स्वाधीनता और नास्तिकता जैसे विषयों पर दुनिया के अनगिनत विश्वविद्यालयों के अलावा, इन्होंने विश्वस्तरीय मंचों पर अपने बयान जारी किए हैं। ‘अभिव्यक्ति के अधिकार’ के समर्थन में, वे समूची दुनिया में, एक आन्दोलन का नाम बन चुकी हैं।

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