PAUL GOMRA KA SCOOTER

Format:Paper Back

ISBN:978-81-8143-841-6

Author:UDAY PRAKASH

Pages:160

MRP:Rs.125/-

Stock:Out of Stock

Rs.125/-

Details

पॉल गोमरा का स्कूटर

Additional Information

“पाकिस्तान में वह सभी कुछ है, जो कुछ हिन्दुस्तान में है...सिर्फ़ उदय प्रकाश जैसे कथाकार को छोड़कर।" अज़मल क़माल सम्पादक : आज, कराची, पाकिस्तान / “उदय प्रकाश ने कहानी के शिल्प के अन्दरूनी ढाँचे को बदला है और कहानी कहने के बने-बनाये फॉर्म को तोड़ा है। शिल्प के नये प्रयोगों के साथ, नयी कथा जगतों को आविष्कृत करते हए जटिल संरचना वाली कछ सरल एवं बहआयामी कहानियाँ लिखी हैं। उनकी कहानियाँ प्रतीकों, चिह्नों व संकेतों की जो नयी संरचना एवं सूझ-मॉडल निर्मित करती हैं, उससे कहानी जहाँ कलात्मक स्तर पर सघन व सौन्दर्यवान बनती है, वहीं बहुअर्थी व दृष्टिसम्पन्न भी बनती है।" स्व. सरबजीत पल प्रतिपल : मार्च-जून 1998 / “उदय प्रकाश की कहानियों पर बहुत सारी अनर्गल समीक्षाएँ अभी तक लिखी गयी हैं, लिखी जा रही हैं। आगे नहीं लिखी जायेंगी, इसकी भी कोई गारण्टी नहीं है। ऐसा दरअसल इसी कारण है कि उदय प्रकाश हमारे अब तक के खाँचे या साँचे में फिट नहीं बैठते। हम जिस खाँचे में भी उन्हें फिट करते हैं, उनका कोई-न-कोई हाथ या पाँव बाहर निकला रह ही जाता है। कभी-कभी तो उनका सिर ही बाहर झाँकता दिखाई देता है और हमें लगने लगता है कि वे बड़ी शरारती और चुनौतीपूर्ण निगाहें चलाते और भौंहें मटकाते हम पर हँसे जा रहे हैं। हम हतप्रभ रह जाते हैं। ...क्या यह एक लेखक की अराजकता या 'अनुशासनहीनता' है?" शम्भु गुप्त आलोचना : जनवरी-मार्च 2004

About the writer

UDAY PRAKASH

UDAY PRAKASH उदय प्रकाश 1952, मध्य प्रदेश के शहडोल (अब अनूपपुर) ज़िले के गाँव सीतापुर में जन्म। सागर वि.वि. सागर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से शिक्षा प्राप्त। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और इसके मणिपुर केन्द्र में लगभग चार वर्ष तक अध्यापन। संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश, भोपाल में लगभग दो वर्ष विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी। इसी दौरान ‘पूर्वग्रह’ का सहायक सम्पादन। नौ वर्षों तक टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के समाचार पाक्षिक ‘दिनमान’ के सम्पादकीय विभाग में नौकरी। बीच में एक वर्ष टाइम्स रिसर्च फ़ाउंडेशन के स्कूल ऑफ़ सोशल जर्नलिज्म में अध्यापन। लगभग दो वर्ष पी.टी.आई. (टेलीविज़न) और एक वर्ष इंडिपेंडेंट टेलीविज़न में विचार और पटकथा प्रमुख। कुछ समय ‘संडे मेल’ में वरिष्ठ सहायक सम्पादक रहे। इन दिनों स्वतन्त्र लेखन तथा फ़िल्म और मीडिया के लिए लेखन। ‘सुनो कारीगर’, ‘अबूतर-कबूतर’, ‘रात में हारमोनियम, ‘एक भाषा हुआ करती है’, ‘नयी सदी के लिए चयन: पचास कविताएँ’ (कविता संग्रह); ‘दरियाई घोड़ा’, ‘तिरिछ’, ‘और अन्त में प्रार्थना’, ‘पॉल गोमरा का स्कूटर’, ‘पीली छतरी वाली लड़की’, ‘दत्तात्रोय के दुख’, ‘मोहन दास’, ‘अरेबा परेबा’, ‘मैंगोसिल’ (कहानी संग्रह); ‘ईश्वर की आँख’, ‘अपनी उनकी बात’ और ‘नयी सदी का पंचतन्त्र’ (निबन्ध, आलोचना) पुस्तकें प्रकाशित। इसके अलावा लगभग 8 पुस्तकें अंग्रेज़ी में प्रकाशित। ‘पीली छतरी वाली लड़की’ (उर्दू), ‘तिरिछ अणि इतर कथा’, ‘अरेबा परेबा’ (मराठी), ‘मोहन दास’ कन्नड़ में प्रकाशित, पंजाबी, उड़िया, अंग्रेज़ी में प्रकाश्य। ‘लाल घास पर नीले घोड़े’ (मिखाइल शात्रोव के नाटक का अनुवाद और रूपान्तर), ‘कला अनुभव’ (प्रो. हरियन्ना की सौन्दर्यशास्त्रीय पुस्तक का अनुवाद), ‘इन्दिरा गाँधी की आखिरी लड़ाई’ (बी.बी.सी. संवाददाता मार्क टली-सतीश जैकब की किताब का हिन्दी अनुवाद), ‘रोम्यां रोलां का भारत’ (आंशिक अनुवाद और सम्पादन) का अनुवाद। भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, ओमप्रकाश साहित्य सम्मान, श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार, मुक्तिबोध पुरस्कार, साहित्यकार सम्मान, हिन्दी अकादेमी, दिल्ली, रामकृष्ण जयदयाल सद्भावना सम्मान, पहल सम्मान, कथाक्रम सम्मान, पुश्किन सम्मान, द्विजदेव सम्मान, साहित्य अकादेमी पुरस्कारों से पुरस्कृत।

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