PITA BHEE TO HOTE HEIN MAAN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-916-8

Author:RAJAT RANI MEENU

Pages:184


MRP : Rs. 395/-

Stock:In Stock

Rs. 395/-

Details

पिता भी तो होते हैं माँ

Additional Information

इस संकलन की सभी कविताएँ एकान्त में दिया गया कवयित्री का निजी हलफनामा हैं। इनमें कोई कल्पना नहीं है, अपितु जीवनानुभवों की काव्यमय प्रस्तुति है। स्त्री का दर्द, एक स्त्री ही लिख सकती है, समझ सकती है। हम पुरुषों की औकात के बाहर है उनकी भीतरी दुनिया को जानना-समझना। रविवार का दिन', जैसी श्रेष्ठ अनुभवजनक कविता, केवल स्त्री, हाँ, केवल एक नौकरी पेशा स्त्री ही लिख सकती है। जिस तरह से यह कहा जाता है कि दलित साहित्य कोई गैर-दलित नहीं लिख सकता है, वैसे ही मेरा दावा है कि स्त्री साहित्य भी कोई पुरुष नहीं लिख सकता, बिल्कुल नहीं लिख सकता। प्रो. कालीचरण स्नेही

About the writer

RAJAT RANI MEENU

RAJAT RANI MEENU रजत रानी ‘मीनू' जन्म : उ.प्र. के शाहजहाँपुर जनपद के जौराभूड़ नामक गाँव में। शिक्षा : एम.फिल., पीएच.डी. (हिन्दी दलित कथासाहित्य का आलोचनात्मक मूल्यांकन); जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय। प्रकाशित सामग्री: • हिन्दी दलित कविता (पुस्तक) • हिन्दी दलित कथा-साहित्य : अवधारणा और विधाएँ (पुस्तक) • हाशिए से बाहर (सम्पादित कहानी-संग्रह) • अन्याय कोई परम्परा नहीं (सह-सम्पादन) पत्र-पत्रिकाएँ: हंस, कादम्बिनी, हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, अन्यथा, अपेक्षा, बयान, वसुधा, अंगुत्तर, युद्धरत आम आदमी, इंडिया टुडे आदि पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ 'आत्मकथांश एवं समीक्षाएँ प्रकाशित। अनेक प्रकाशित हिन्दी ग्रन्थों में शोध-पत्र संकलित। 'नवें दशक की हिन्दी दलित कविता पुस्तक मध्य प्रदेश दलित साहित्य अकादमी, उज्जैन द्वारा पुरस्कृत। 'सम्प्रति : असिस्टेंट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, कमला नेहरू कॉलेज, खेल गाँव, नयी दिल्ली। निवास : 1/122, वसुन्धरा, गाजियाबाद (उ.प्र.) मो. : 9911043588

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality