RAKTCHAP AUR ANYA KAVITAYEN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-763-8

Author:PANKAJ CHATURVEDI

Pages:144


MRP : Rs. 325/-

Stock:In Stock

Rs. 325/-

Details

रक्तचाप और अन्य कविताएँ

Additional Information

सरमायादारी की दुनिया में कविता का कारख़ाना बेमनाफ़ा है। इसी कारख़ाने से निकला पंकज चतुर्वेदी का यह ताज़ा कविता-संग्रह उन लोगों से मुख़ातब है, जो सयाने नहीं हैं। इसे पढ़ते हुए सयाने कुछ अबोध हो सकें और अबोध कुछ सयाने. तो सयानेपन और अबोधता की अभी की परिभाषाएँ अपनी जगहों से थोड़ा-थोड़ा खिसकें। डेढ़ दशक पहले उनका पहला संग्रह आया था-'एक सम्पूर्णता के लिए। यह चाहत अभी भी बरकरार है, अलबत्ता इसकी उपलब्धि की बेइंतिहा कठिनाइयों का बोध अब कहीं ज़्यादा तल्ख़ है। 'पाँच महीने के अपने बच्चे से बातचीत के बहाने' में कवि प्रकृति की सुन्दरता में विस्मित और 'निमज्जित' बच्चे में इसी मानवीय सम्पूर्णता की ललक पाता है। एक और कविता 'संवाद' में इसी बच्चे के साक्ष्य से वह कहता है "कि संवाद/हर सूरत में सम्भव है।" लेकिन मुनाफ़े की सभ्यता समाज को बीमार, मनुष्य को बेसिर-पैर, अधूरा और अकेला तथा संवाद को विरूप बनाये बग़ैर फल-फूल नहीं सकती। संग्रह की शीर्षक कविता में जो 'रक्तचाप' है, वह इसी परिस्थिति की प्रतिक्रिया है- “रक्तचाप बन्द संरचना वाली जगहों में-/चाहे वे वातानुकूलित ही क्यों न हों-/साँस लेने की छटपटाहट है।" यहाँ बीमारियाँ, एक बीमार समाज की विडम्बनाओं की रूपक हैं-'"दर्द है इस समाज को बहुत है/पर उस दुख के कारणों पर कोई रैडिकल बहस नहीं है।" विडम्बना यह भी है कि इंसान बीमारी की शिनाख़्त, कारण और इलाज की चेतना भी बीमारी पैदा करनेवालों से ही पाता है। बीमारी से उसकी लड़ाई भी बीमार होती है, क्योंकि वह निजी होती है-“पर वह संघर्ष नहीं/उसका मिथ होता है/वह इतना निजी होता है कि कैंसर होता है।" -प्रणय कृष्ण

About the writer

PANKAJ CHATURVEDI

PANKAJ CHATURVEDI पंकज चतुर्वेदी का जन्म 24 अगस्त, 1971 को इटावा (शहर) (उ.प्र.) में हुआ। यों पैतृक गाँव तिश्ती, उत्तर प्रदेश के कानपुर-देहात जनपद में है। इटावा और कानपुर के गाँवों-कस्बों में आरम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद सातवीं कक्षा से उ.प्र. सैनिक स्कूल, लखनऊ के छात्र हुए। वहाँ से 1989 में आई.एस. सी. और फिर लखनऊ विश्वविद्यालय से 1992 में बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से 1994 में एम. ए. (हिन्दी) में प्रथम स्थान हासिल किया और 1998 में एम. फिल. में भी। वहीं से 2007 में पीएच.डी.। कविता, संस्कृति और शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अन्यान्य समीक्षात्मक निबन्ध, अंग्रेज़ी से हिन्दी में सृजनात्मक एवं आलोचनात्मक लेखन के कुछ अनुवाद और अनेक साक्षात्कार प्रकाशित। कविता के लिए वर्ष 1994 के भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार और आलोचना के लिए 2003 के देवीशंकर अवस्थी सम्मान एवं उ.प्र. हिन्दी संस्थान के रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार से सम्मानित। प्रकाशित कृतियाँ : एक सम्पूर्णता के लिए (1998), एक ही चेहरा (2006)-कविता-संग्रह; आत्मकथा की संस्कृति (2003), निराशा में भी सामर्थ्य (2013)-आलोचना; रघुवीर सहाय (2014)-साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली के लिए विनिबन्ध । इसके अतिरिक्त भर्तृहरि के इक्यावन श्लोकों की हिन्दी अनुरचनाएँ प्रकाशित । रक्तचाप और अन्य कविताएँ तीसरा कविता-संग्रह। 1996 से 2013 तक वी.एस.एस.डी.पी.जी.कॉलेज, कानपुर में अध्यापन। इन दिनों हिन्दी विभाग, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) में। पता : सी-95, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.)-470003 मोबाइल : 09425614005

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