HATHELI MEIN INDRADHANUSH

Original Book/Language: उड़िया भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित.

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-783-6

Author:SITAKANT MAHAPATRA & Translated by SUJATA SHIVEN

Translation:सीताकान्त महापात्र का काव्य संसार विस्तृत फलक को समेटे है। आदिवासी, दलित, किसान, मज़दूर से लेकर समुद्र, जगन्नाथ, ब्रह्मांड आदि का चित्रण बड़ी सहजता से उनकी कविताओं में मिलता है। उनकी अभिव्यक्ति में प्रकृति और जीवन के साथ परम्परा सहज रूप से शामिल है। सम्मिलन और सृजन का यही कौशल उनकी भावधारा को ऊर्ध्व बनाता है। आधुनिकता और परम्परा के तालमेल से भविष्य के विकसित समाज, परिवार, मनुष्य और जीवन की कामना महापात्र के समूचे सृजन कर्म में दिखती है। ख़ुद कवि के शब्दों में, यथार्थ को देखने का फायदा परम्परा से मिलता है, वास्तविक आधुनिकता परम्परा का नवीनतम रूप है; उसका नव कलेवर आत्मिक नव प्रवर्तन है। सीताकान्त महापात्र की कविताओं के पाठक के समक्ष ओडिशा के ग्राम्य जीवन की झाँकियाँ, वहाँ का जनजातीय जीवन, कला, संस्कृति सभी जीवन्त हो उठते हैं। कवि की नज़रों में, “अच्छी कविता में हर शब्द बोलता है, हर शब्द अपरिहार्य है, अद्वितीय लगता है, अनेकानेक के सम्पर्क से भावविदग्ध अनुभूति मं डूबा होता है, शब्द पुलकित रहता है। यहाँ हर शब्द मन्त्रपूत रहता है।” और यही सोच महापात्र की हर कविता में परिलक्षित होती है। कवि के लिए कविता कोरा शब्द विलास नहीं, अनवरत तपस्या है, जीवन व्यापी ही नहीं, जन्म-जन्मान्तर की साधना है जो वर्णनातीत है यही बात कवि सीताकान्त जी के लिए भी समानरूप से लागू है। हिन्दी के काव्य प्रेमी पाठकों के समक्ष श्री महापात्र के व्यापक काव्य संसार की चुनिन्दा कविताएँ उनके नये संकलन, ‘हाथ पापुलिरे इन्द्रधनुष' से अनूदित होकर, 'हथेली में इन्द्रधनुष' शीर्षक से आपके समक्ष प्रस्तुत है।

Pages:128


MRP : Rs. 300/-

Stock:In Stock

Rs. 300/-

Details

उड़िया भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित.

Additional Information

सीताकान्त महापात्र का काव्य संसार विस्तृत फलक को समेटे है। आदिवासी, दलित, किसान, मज़दूर से लेकर समुद्र, जगन्नाथ, ब्रह्मांड आदि का चित्रण बड़ी सहजता से उनकी कविताओं में मिलता है। उनकी अभिव्यक्ति में प्रकृति और जीवन के साथ परम्परा सहज रूप से शामिल है। सम्मिलन और सृजन का यही कौशल उनकी भावधारा को ऊर्ध्व बनाता है। आधुनिकता और परम्परा के तालमेल से भविष्य के विकसित समाज, परिवार, मनुष्य और जीवन की कामना महापात्र के समूचे सृजन कर्म में दिखती है। ख़ुद कवि के शब्दों में, यथार्थ को देखने का फायदा परम्परा से मिलता है, वास्तविक आधुनिकता परम्परा का नवीनतम रूप है; उसका नव कलेवर आत्मिक नव प्रवर्तन है। सीताकान्त महापात्र की कविताओं के पाठक के समक्ष ओडिशा के ग्राम्य जीवन की झाँकियाँ, वहाँ का जनजातीय जीवन, कला, संस्कृति सभी जीवन्त हो उठते हैं। कवि की नज़रों में, “अच्छी कविता में हर शब्द बोलता है, हर शब्द अपरिहार्य है, अद्वितीय लगता है, अनेकानेक के सम्पर्क से भावविदग्ध अनुभूति मं डूबा होता है, शब्द पुलकित रहता है। यहाँ हर शब्द मन्त्रपूत रहता है।” और यही सोच महापात्र की हर कविता में परिलक्षित होती है। कवि के लिए कविता कोरा शब्द विलास नहीं, अनवरत तपस्या है, जीवन व्यापी ही नहीं, जन्म-जन्मान्तर की साधना है जो वर्णनातीत है यही बात कवि सीताकान्त जी के लिए भी समानरूप से लागू है। हिन्दी के काव्य प्रेमी पाठकों के समक्ष श्री महापात्र के व्यापक काव्य संसार की चुनिन्दा कविताएँ उनके नये संकलन, ‘हाथ पापुलिरे इन्द्रधनुष' से अनूदित होकर, 'हथेली में इन्द्रधनुष' शीर्षक से आपके समक्ष प्रस्तुत है।

About the writer

SITAKANT MAHAPATRA & Translated by SUJATA SHIVEN

SITAKANT MAHAPATRA & Translated by SUJATA SHIVEN सीताकान्त महापात्र जन्म : 17 सितम्बर, 19371। 1961 से 1995 तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में। पुरस्कार : ओडिशा साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1971 और 1984; कविता संग्रह 'शब्दों का आकाश' के लिए 1974 साहित्य अकादमी पुरस्कार; सारला पुरस्कार, 1985; भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए 1993 में ज्ञानपीठ पुरस्कार; सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार; कबीर सम्मान और कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार: 2002 में पद्म भूषण से सम्मानित; 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित। कृतियाँ : अब तक 18 से ज़्यादा कविता संग्रह, 6 निबन्ध संग्रह, एक यात्रा वृत्तान्त प्रकाशित; इसके अलावा कई विदेशी किताबों का अनुवाद किया है और अंग्रेजी में कई किताबें प्रकाशित; भारतीय भाषाओं के अलावा जर्मन, स्पेनिश, स्वीडिश समेत 11 विदेशी भाषाओं में उनकी कविताएँ अनूदित और प्रकाशित। उल्लेखनीय कृतियाँ : ओड़िया में पहला कविता संग्रह, दीप्ति ओ द्युति 1963 में प्रकाशित; अष्टपदि 1963, शब्दर आकाश 1971, आर दृश्य 1981, श्रेष्ठ कविता 1994; शब्द, स्वप्न ओ निर्विक्त 1990 (निबन्ध); अनेक शरत 1981 (यात्रा वृत्तान्त)। अंग्रेजी में : The ruined Temple and other poems 1996 (Poetry, translation); Unending Rhythms (Oral poetry of Indian Tribals in translation); Memories Of Time (Selected Poems). / सुजाता शिवेन ओडिशा के संबलपुर में जन्मी सुजाता शिवेन ने कविता, हाइकु, निबन्ध, लघुकथाएँ और कहानी लेखन के साथ ही हिन्दी से ओडिआ और ओडिआ से हिन्दी अनुवाद में अपनी खास पहचान बनायी है। मौलिक कविता संग्रह, 'कुछ और सच' (हिन्दी में) प्रकाशन के साथ ही उनके द्वारा अनूदित रचनाएँ देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अब तक उनके द्वारा अनूदित दर्जन भर से अधिक किताबें साहित्य अकादेमी, नेशनल बुक ट्रस्ट, भारतीय ज्ञानपीठ, शिल्पायन, राधाकृष्ण प्रकाशन, प्रभात प्रकाशन और नमन प्रकाशन जैसे चर्चित प्रकाशनों से प्रकाशित हो चुकी हैं। समकालीन ओडिआ साहित्य के लगभग सभी महत्त्वपूर्ण रचनाकारों जिनमें मनोज दास, सीताकान्त महापात्र, रमाकान्त रथ, जे.पी. दास, प्रतिभा राय, फनी महांति, यशोधरा मिश्र, विपिन बिहारी मिश्र, तरुण कांति मिश्र, इन्दुलता महांति, प्रमोद सर, शैलबाबा महापात्र, महेन्द्र मिश्र, रत्नाकर शउत आदि की ओडिआ कृतियों से हिन्दी पाठकों को उन्होंने बख़ूबी रूबरू कराया है। सम्पर्क : 23 सी, शिवालिक अपार्टमेंट, प्लॉट न. 32, सेक्टर-6, द्वारका, नयी दिल्ली-110075 मोबाइल : 9910488414

Books by SITAKANT MAHAPATRA & Translated by SUJATA SHIVEN

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality