HANS AKELA

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-616-7

Author:VINEETA GUPTA

Pages:292


MRP : Rs. 250/-

Stock:In Stock

Rs. 250/-

Details

हंस अकेला

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'हंस अकेला' की पांडुलिपि को अभी-अभी पढ़कर खतम किया है... महसूस कर रही हैं, पौ फटे का सूरज केवल पूर्व दिशा में ही नहीं जन्मता। उसकी दिशाएँ अनेक रूपों और आकारों में परिवर्तित होती अपनी प्रसव भूमि सिरजिनी रहती हैं। उन आकारों को हम जिस रूप में देख रहे होते हैं मात्र वही और उतना ही उसका सच नहीं होता। कभी-कभी वह किसी दिए की कोख से बाती की लौ बन कर जन्मता है, तो कभी किसी माँ की कोख तलाश किसी भ्रूण की शक्ल अख्तियार कर जन्मने को छटपटा आता है। अन्धकार के प्रतिरोध में ही सूर्य जन्मता है। अन्धकार की अनीति से मोर्चा लेने के लिए। सेठ जयचन्द लाल की पत्नी पाँची देवी की कोख से शिश रूपा का जन्म दिए की कोख से उसी बाती की लौ का जन्मना है, जिसका जन्म ही अन्धकार के प्रतिरोध के लिए हआ है। आचार्य तुलसी सरदार शहर पधारे थे चातुर्मास के लिए। विरल बालक रूपा ने जिद ठान ली - मुनि दीक्षा लेने की। हंस किसी ठियाँ बँधकर कैसे रह सकता था! पिता जयचन्द लाल सिन्धी उसका हठ देख विचलित हो उठे। बालक रूपा ने पिता से कहा- 'जो नियम जबरन दिलवाये जाते हैं या थोपे जाते हैं उनका पालन करना मुश्किल होता है। लेकिन जब हम अपने आप कोई संकल्प लेते हैं तो उसे जीवन भर निभाना मुश्किल नहीं होता...' मन्त्री मुनि ने बालक रूपा की अलौकिकता का आभास कर विचलित पिता जयचन्द जी को आश्वस्त किया था - 'रूपा के लिए इतनी आशंकाएँ मत पाल। देख, आज यह जिस सिंह-वृत्ति से दीक्षा लेने की बात कर रहा है, यहीं सिंह-वृत्ति उसे संन्यास के पथ पर आगे तक ले जाएगी। बालक रूपा दीक्षित होकर मुनि रूपचन्द्र कहलाया और सत्य का यही तपोनिष्ठ महान्वेषक, मानव कल्याण का महाउपासक बनकर आज हमारे समक्ष सत-असत में से सत चुनने और उसके कंटकीर्ण मार्ग का अवलम्बन कर मानव जीवन को सार्थक करने की प्रेरणा बन गया है। ...मानव सेवा के उपासक जैन मुनि, कवि मन रूपचन्द्र जी के जीवन पर आधारित यह मुँदे चक्षुओं की चौखट पर दस्तक कदेने वाली प्रेरणास्पद औपन्यासिक कृति 'हंस अकेला' उन सभी सुधी पाठकों के अन्तर्मन के प्रकोष्ठों में बाती की उजास भरने में सक्षम है-जिनके लिए अन्धकार चुनौती है... -चित्रा मुद्गल

About the writer

VINEETA GUPTA

VINEETA GUPTA डॉ. विनीता गुप्ता पीएच.डी., कानपुर विश्वविद्यालय एम.ए. (हिन्दी), दिल्ली विश्वविद्यालय एम.ए. (एम.सी.), मास्टर ऑफ़ आर्ट्स, मास कम्युनिकेशन, गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार पी.जी. डिप्लोमा इन जर्नलिज्म, कोटा मुक्त विश्वविद्यालय, जयपुर बी.ए. ऑनर्स (हिन्दी), दिल्ली विश्वविद्यालय 29 वर्षों से समाचारपत्र और टेलीविज़न पत्रकारिता में सक्रिय। अनेक डॉक्यूमेंटरी फ़िल्मों का निर्माण। नान्यांग टेक्नोलोज़िकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर के रिसर्च प्रोजेक्ट में को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (2009-2011) कृतियाँ: क़तरा-क़तरा ज़िन्दगी, इन दिनों (ग़ज़ल संकलन), हिन्दी ग़ज़ल की विकास यात्रा में दुष्यन्त कुमार का योगदान (शोध प्रबन्ध), ओजस्विनी (एक साध्वी की जीवन-गाथा), हंस अकेला (उपन्यास) अनूदित कृतियाँ: कुफ़्र, बर्फ़ का गोला (उपन्यास), कुतुब मीनार है विष्णु ध्वज, भारत के यादव: कृष्ण के वंशज, संघवाद: एक परिचय, मानवाधिकार और सशस्त्र सेनाएँ, शैतान से संवाद: मेरी आत्मा किसने चुरायी सम्पादन : गुलदस्ता (भारतीय भाषाओं के 18 कवियों की कविताओं का संकलन) अनेक पुस्तकों में ग़ज़लें और आलेख संकलित अनेक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों और संगोष्ठियों में शोधपत्रों का प्रस्तुतीकरण सम्प्रति : एसोसिएट प्रोफेसर, महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़, रोहिणी, दिल्ली-110085

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