KAALKHAND

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-966-3

Author:GYANPRAKASH VIVEK

Pages:138


MRP : Rs. 295/-

Stock:In Stock

Rs. 295/-

Details

कालखण्ड

Additional Information

ज्ञानप्रकाश विवेक ऐसे संजीदा, शाइस्ता और नये समय पर पैनी नज़र रखनेवाले कथाकार हैं जो पिछले पैंतीस वर्षों से कहानियाँ लिख रहे हैं। उनके पास कहानी की समृद्ध कला और अनुभवों का सरमाया है। उन्होंने न सिर्फ़ कहानी को कलात्मक ऊँचाई प्रदान की है बल्कि ऐसी नयी कथा भाषा का भी सृजन किया है जो संवेदन लय से भरपूर है। जिसमें जीवन राग है और दरिया की रवानी। इस नयी कथा भाषा ने ज्ञानप्रकाश विवेक की कहानियों को न सिर्फ़ वैभवशाली कहानीपन दिया है बल्कि नये समय के नये यथार्थ की चुनौती, हलचल, बेचैनी, व्याकुलता, आवेग और जिज्ञासाओं के लिए भी नुकीले दृष्टिबोध की खोज की है। कालखण्ड संग्रह की कहानियाँ नये समय के नये समाज के बीहड़ में गहरे तक उतरती हैं। यह ऐसा कालखण्ड है जो मनुष्य को सुविधाओं के गैजेट्स प्रदान करते हुए अकेलेपन की विडम्बनाएँ भी थमा देता है। इन्हीं विडम्बनाओं की तहरीरें और सम्बन्धों को टूटने-बिखरने की आवाज़ें यहाँ सुनाई पड़ती हैं। बेशक! लेकिन प्रेम और स्मृति की भी माकूल, विनम्र, जज्बाती और अर्थवान जगह है जिसमें कई समयों की गूँज तथा ऐसा जोन ऑफ़ साइलेंस भी है जो भाषा को साँस लेना सिखाता है। भमंडलीकरण और उपभोक्तावादी दौर के निस्संग समाज की विभिन्न छवियों को उद्घाटित करती ये कहानियाँ, नये सामाजिक मंज़रनामे की बेबाक और बेलौस तहरीर हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण और सार्थक बात, इन कहानियों के सिलसिले में यह है कि क़िस्सागोई शिद्दत के साथ मौजूद है जो कहानियों को पठनीय बनाती है तथा सुबहदमधूप की-सी चमक प्रदान करती है।

About the writer

GYANPRAKASH VIVEK

GYANPRAKASH VIVEK ज्ञानप्रकाश विवेक जन्म: 30 जनवरी 1949 शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), सेवानिवृत्ति के बाद पूर्ण कालिक लेखन। प्रकाशित कृतियाँ: अलग-अलग दिशाएँ, जोसफ़ चला गया, शहर गवाह है, उसकी जश्मीन, पिताजी चुप रहते हैं, इक्कीस कहानियाँ, शिकारगाह, मुसाफ़िरख़ाना, बदली हुई दुनिया, सेवानगर कहाँ है (कहानी संग्रह); गली नम्बर तेरह, अस्तित्व, दिल्ली दरवाज़ा, आखेट, चाय का दूसरा कप तथा तलघर (उपन्यास); धूप के हस्ताक्षर, आँखों में आसमान, इस मुश्किल वक्श्त में तथा गुफ़्तगू अवाम से है (ग़ज़ल संग्रह); दरार से झाँकती रोशनी (कविता संग्रह); हिन्दी ग़ज़ल की विकास यात्रा तथा हिन्दी ग़ज़ल दुष्यन्त के बाद। नया समय नया यथार्थ (आलोचना)। कुछ सम्मान तथा कुछ पुरस्कार। संस्कृति मन्त्रालय द्वारा हिन्दी ग़ज़ल पर सीनियर फेलोशिप। सम्पर्क: 1875, सेक्टर-6, बहादुरगढ़µ124507 मोबाइल: 09813491654 ई-मेल: gyanpvivek@gmail.com

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