BHARTIYA SAHITYA KI PAHCHAN

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-992-2

Author:DR. SIYARAM TIWARI

Pages:664


MRP : Rs. 1595/-

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Details

कोई भी भाषा अपने साहित्य की दृष्टि से ही अपने प्रति श्रद्धा आकर्षित कर सकती है। इस प्रकार का विशेष महत्त्व हिन्दी भाषा के साहित्य में यथेष्ट रूप में पाया जाता है। मध्ययुग के साधक कवियों ने हिन्दी भाषा में जिस भावधारा का ऐश्वर्य-विस्तार किया है उसमें असाधारण विशेषता पायी जाती है। वह विशेषता यही है कि उनकी रचनाओं में उच्च कोटि के साधक एवं कवियों का एकत्र सम्मिश्रण हुआ है। इस प्रकार का सम्मिश्रण दुर्लभ है। -रवीन्द्रनाथ ठाकुर / यूरोपीयन पंडित यह अनुमान नहीं कर सकते कि भारतीय साहित्य एक जीवित जाति की साधना -हजारी प्रसाद द्विवेदी / वास्तव में, भारतीय साहित्य की धारणा का सीधा सम्बन्ध भारतीय संस्कृति और भारतीय राष्ट्र की धारणा के साथ जुड़ा हुआ है। जिस प्रकार सहस्राब्दियों से धर्म, जाति, भाषा आदि के वैविध्य के रहते हुए भी भारतीय संस्कृति में मलभूत एकता रही है और भारतीय राष्ट्र आज जीवन्त सत्य के रूप में विद्यमान है, इसी प्रकार भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता का निषेध भी नहीं किया जा सकता। तत्त्व रूप में, भारतीय साहित्य एक इकाई है, उसका समेकित अस्तित्व है जो भारतीय जीवन की अनेकता में अन्तर्व्याप्त एकता को अभिव्यक्त करता है। -डॉ. नगेन्द्र / कीजै न जमील उर्दू का सिंगार, अब ईरानी तलमीहों से, पहनेगी विदेशी गहने क्यों यह बेटी भारतमाता की? -जमील मज़हरी

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About the writer

DR. SIYARAM TIWARI

DR. SIYARAM TIWARI डॉ. सियाराम तिवारी जन्म: 5 दिसम्बर, सन् 1934 ई.। स्थान : बिहार राज्य के वैशाली (तत्कालीन मुजफ़्फ़रपुर) जिलान्तर्गत नारायणपुर बुजुर्ग नामक ग्राम जो हाज़ीपुर-महुआ रोड पर हाजीपुर से लगभग दस किलोमीटर पर अवस्थित है। शिक्षा : एम.ए. (बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर), पीएच. डी., डी.लिट्. (पटना विश्वविद्यालय)। पूर्व कार्य : विश्वभारती, शान्तिनिकेतन (प.बं.) से हिन्दी-विभागाध्यक्ष एवं मानविकी तथा समाजविज्ञान संकायाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त; हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद में अतिथि आचार्य; हंगेरियन युनिवर्सिटी ऑफ़ ट्रैसिलवेनिया (रोमानिया) में अतिथि आचार्य; नालन्दा खुला विश्वविद्यालय, पटना में भाषा-संकाय के मुख्य समन्वयक। प्रकाशित कृतियाँ : हिन्दी के मध्यकालीन खंडकाव्य (दिल्ली, 1964); बज्जिका भाषा और साहित्य (पटना, 1964); हलधरदासकृत सुदामाचरित्र (पटना, 1966); सिद्धान्त, अध्ययन और समस्याएँ (पटना, 1967); काव्यभाषा (नयी दिल्ली, 1976); साहित्यशास्त्र और काव्यभाषा (साहिबाबाद, 1978); रेणु : कर्तृत्व और कृतियाँ (पटना, 1983); तुलसीदास का आचार्यत्व (नयी दिल्ली, 1985); पाठानुसन्धान (इलाहाबाद, 1987); नन्दलाल बोस (नयी दिल्ली, 1991); साहित्य और हिन्दी-साहित्य (पटना, 1992); मंझन (नयी दिल्ली, 1998); जानकीवल्लभ शास्त्री : कर्तृत्व और कृतियाँ (इलाहाबाद, 1998); आनन्द शंकर माधवन की सारस्वत साधना (मंदार विद्यापीठ, 1999); चिन्तन की रेखाएँ (दिल्ली, 2003); हिन्दी-साहित्य : भाषिक परिदृश्य (दिल्ली, 2005); सुनि आचरज करै जनि कोई (नयी दिल्ली, 2008); भारतीय साहित्य की पहचान (पटना, 2009); रोमानिया-यात्रा की 'डायरी, (अहमदाबाद, 2009); पाटलिपुत्र से शान्तिनिकेतन (दरभंगा, 2011); शैलेश मटियानी के पत्र (दिल्ली, 2013); 'महामानव रवीन्द्रनाथ और अन्य निबन्ध (दिल्ली, 2013)। सम्पर्क : एन-2, प्रोफेसर कॉलोनी, कंकड़बाग, पोस्ट-लोहिया नगर, पटना-800020 दूरभाष : 08809941431, 09431808456

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