TRIKON

Format:Paper Back

ISBN: 978-93-5072-155-1

Author:VIJAYDAN DETHA

Pages:228


MRP : Rs. 200/-

Stock:In Stock

Rs. 200/-

Details

त्रिकोण

Additional Information

राजस्थान की माटी की लोककथाएँ और विजयदान देथा की लेखनी-दोनों एक ऐसा संयोग बनाते हैं जिसे आधुनिक राजस्थानी गद्य-साहित्य में गुणात्मक परिवर्तन की भूमिका के बतौर पढ़ा जाता है। उनकी विशिष्ट शैली, भाषा और मानवीय व्यवहारों के गहन अध्ययन की उनकी क्षमता ने उन लोककथाओं को नये आयाम दिये। राजस्थानी जन-समाज की सांस्कृतिक एवं सामूहिक अनुभूति लोककथाओं की जिस मौखिक-परम्परा का हिस्सा रही हैं, विजयदान देथा ने लिखते हुए उन्हें नवीन मान्यताओं एवं मूल्यों की प्रस्थापना करनेवाली साहित्यिक अभिव्यंजनाओं के रूप में देखा। असल में लोककथाएँ लगातार बुराई पर अच्छाई की जीत, असत्य पर सत्य की विजय, क्रूरता पर दयालुता की विजय और मृत्यु पर जीवन के आनन्द के विजय का ही आख्यान रचती आयी हैं-जीवन में सुन्दर की सम्भावना और उसकी आकांक्षा की अभिव्यक्ति का रूप बनकर। विजयदान देथा की जानी-पहचानी और विशिष्ट कथा शैली में बने गये दो लघु उपन्यास 'रिजक की मर्यादा' और 'मायाजाल' तथा लम्बी कहानी 'क़ुदरत की बेटी'-इन तीन कृतियों का संयोग ही है यह पुस्तक 'त्रिकोण'। लोककथा वस्तुतः मौखिक साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है। इस दृष्टि से लोककथा प्रामाणिक लेखन में राजस्थानी भाषा का ही प्रयोग आवश्यक समझा गया है। कुल मिलाकर ये उपन्यास भी है, कहानी भी है। और घटनाओं में रवानी भी-जिनके संगम से बेजोड़ आख्यान का जन्म होता है।

About the writer

VIJAYDAN DETHA

VIJAYDAN DETHA विजयदान देथा, जिन्हें उनके मित्र प्यार से बिज्जी कहते हैं, राजस्थानी के प्रमुख लेखक हैं। वे हिन्दी में भी लिखते रहे हैं। देथा ने आठ सौ से अधिक कहानियाँ लिखी हैं, जिनमें से अनेक का अनुवाद हिन्दी, अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं में हो चुका है। राजस्थान की लोक कथाओं और कहावतों के संग्रह एवं पुनर्लेखन के क्षेत्रा में विजयदान देथा का योगदान विश्व स्तर पर समादृत है। उनकी कहानियों पर आधारित तीन हिन्दी फिल्में - दुविधा, पहेली और परिणीता - बन चुकी हैं और चरनदास चोर सहित अनेक नाटक लिखे और मंचित हो चुके हैं। साहित्य अकादेमी तथा अन्य अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। कुछ प्रमुख कृतियाँ: बातारी फुलवारी (13 खण्ड), रूँख, दुविधा और अन्य कहानियाँ, उलझन, सपनप्रिया, अन्तराल तथा राजस्थानी-हिन्दी कहावत कोश। राजस्थानी लोक गीत (6 भाग) का संकलन-सम्पादन।

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