ANUPRAYUKTA BHASHAVIGYAN KI VYAVAHARIK PARAKH

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-249-3

Author:GURRAMKAUNDA NEERAJA

Pages:303


MRP : Rs. 495/-

Stock:In Stock

Rs. 495/-

Details

अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की व्यावहारिक परख

Additional Information

अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की सैद्धान्तिकी पर चाहे जितना लिखा गया हो, उसकी व्यावहारिक परख के बारे में पुस्तकाकार नहीं लिखा गया है। इसका कारण लेखकों के समक्ष इकहरेपन से उभरी चुनौतियाँ हैं। प्रायः या तो हम कोरी सैद्धान्तिकी को समर्पित होते हैं या उसे समझने की आवश्यकता अनुभव न करते हुए उसके निपट प्रयोक्ता। हम यह विचारने की भी कोशिश नहीं करते कि किसी भी लेखक, अध्येता, अनुवादक और कभी-कभी पाठक की दृष्टि से भी यह इकहरापन हमारे कार्य की गम्भीरता, उपादेयता और प्रासंगिकता को हल्का बनाता है। हमें सार्थक होने और करने के लिए अपने इकहरेपन से मुक्त होने की महती आवश्यकता है। जो लेखक इस बात को समय पर स्वीकार कर लेता है, उसी का लिखा पीढ़ियों तक चल पाता है। इसके लिए उदाहरण खोजने बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है, हमारे आसपास ही कुछ बड़े सटीक उदाहरण मिल जाते हैं। अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान ने भाषा, पाठ और अनुवाद में जो हस्तक्षेप किया है उसने लेखन, शिक्षण, समालोचना, अनुवाद आदि के परिदृश्य बदल डाले हैं। जिस अनुवाद को अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान का अंग माना जाता है वह भी आज एक स्वतन्त्र अनुशासन के रूप में ढलने के लिए अपना व्याकरण तेजी से तैयार कर रहा है। भाषा तो उसके सहारे अपना नया परिवेश रच ही चुकी है। अब देखना यह है कि इस वैज्ञानिक उपलब्धि के सहारे हम पाठ को कितनी दूर तक ले जाने का कौशल विकसित करते हैं और कहाँ तक उसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक सन्दर्भो के साथ जोड़े रख कर भाषा, साहित्य व मनुष्य के रिश्ते की नयी इबारत लिख पाते हैं। डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा को इस बात का श्रेय देना होगा कि उन्होंने एक ऐसे विषय पर भरपूर सामग्री तैयार की है जो अन्य लोगों के लिए रचनात्मक स्तर पर चुनौती बना हुआ है। उनकी अध्ययनशीलता और संकल्पशीलता के लिए मेरी शुभकामनाएँ! देवराज, आचार्य, अनुवाद अध्ययन विभाग, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ, महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा-442001

About the writer

GURRAMKAUNDA NEERAJA

GURRAMKAUNDA NEERAJA गुर्रमकोंडा नीरजा जन्म: 11 मार्च 1975, चेन्नई। शिक्षा: एम.ए., एम.फिल., पीएच.डी. (हिन्दी), स्नातकोत्तर अनुवाद डिप्लोमा, स्नातकोत्तर पत्रकारिता डिप्लोमा, पी.जी. डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नॉलाजी। प्रकाशन: तेलुगु साहित्य: एक अवलोकन (2012) सम्पादन: भाषा की भीतरी परतें (2012, सदस्य-सम्पादन मंडल), मेरी आवाज़ (2013, सदस्य-संशोधक मंडल एवं अनुवादक मंडल), उत्तरआधुनिकता: साहित्य और मीडिया (2014)। सहसम्पादक: ‘वंति’ मासिक (2008 से)। सहायक सम्पादक: ‘भास्वर भारत’ (2012-13)। पुरस्कार: परिलेख हिन्दी साधक सम्मान (2014), आन्ध्र प्रदेश हिन्दी अकादमी का ‘तेलुगुभाषी युवा हिन्दी लेखक’ पुरस्कार (2012), तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी का साहित्य सेवी सम्मान (2014)। सम्प्रति: प्राध्यापक, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद-500004, मोबाइल: 09849986346

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