CHHATTISGARH KE LOKJEEVAN MEIN RAM

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-093-2

Author:AJAY ATPATOO

Pages:192


MRP : Rs. 600/-

Stock:In Stock

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सन्त तुलसीदास के राम एक थे, दुष्टता का पर्याय रावण एक था। उस समय की रामायण बहुत सरल थी और आज की रामायण? वर्तमान की रामायण उस रामायण से कहीं ज़्यादा कठिन है, यही कवि की इस “इतने राम कहाँ से लाऊँ” में दिखाई पड़ता है। और सच यही है कि “राम की एक अवधि थी निश्चित, अपने दिवस अनिश्चित हैं।" राम के वनवास का समय तय था और हमारा वनवास अनिश्चितकालीन है। अहल्या का उद्धार भी तय समय में हो गया, हम आज तक राम के चरण को तरस रहे हैं। कितनी शबरियाँ हाथों में बेर लेकर राम का रास्ता देखते-देखते पथरा-सी गयी हैं। रावण तो हर गली-चौराहे पर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहे हैं, परन्तु राम कहीं नज़र नहीं आते। कितने विवश हो गये हैं हम लोग, जो मन्दिर में राम की पूजा करते हैं और चौराहों पर रावण को नमस्ते करते हैं। वर्तमान की इस व्यथा ने मेरे मन में यथार्थ के राम को स्थापित किया- “मुझसे मत कहना मन्दिर में जाकर शीश झुकाने को, हार, प्रसाद चढ़ाकर घंटा, झालर, शंख बजाने को, रामभक्त बनने से ज़्यादा, बनना राम जरूरी है, मैं आतुर हूँ उसी राम की झलक आप में पाने को।" आख़िर इतने बरस हो गये रामायण पढ़ते, रामायण को गाते लेकिन क्यों आज तक कोई राम नहीं आया। क्योंकि हमने केवल मन्दिरों की मूर्ति में राम को देखा, यथार्थ के राम को देखने का प्रयास कभी नहीं किया। उसी राम को ढूँढ़ने का प्रयास है 'छत्तीसगढ़ के लोकजीवन में राम'। आख़िर उस विराट राम को ढूँढ़ने का प्रयास तो लोकजीवन से ही करना पड़ेगा। मेरे लिए इससे अच्छी बात और क्या होगी कि मैं राम को ढूँढने का प्रयास वहाँ से शुरू कर रहा हूँ जहाँ राम को जन्म देने वाली माता कौशल्या का पवित्र स्थल है।

About the writer

AJAY ATPATOO

AJAY ATPATOO जन्म : 01 मार्च 1977 को बागबहारा जिला-महासमुन्द (छत्तीसगढ़) शिक्षा : स्नातक कार्य : स्वतन्त्र लेखन सम्पादन : ‘उबलता लहू' साप्ताहिक, रायपुर एवं 'युगप्रवाह' मासिक मुम्बई का अनेक वर्ष तक सम्पादन। विशेष : 'द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज' (स्टार वन); 'हास्य कवि मुक़ाबला' (जी स्माइल चैनल); 'वाह क्या बात है' (लाइव इंडिया चैनल); 'वाह-वाह क्या बात है' (सब टीवी) आदि में काव्य-पाठ। 'सिपली सपने' डेली सीरियल जी नेक्स्ट चैनल पर अभिनय एवं बालाजी के कुछ सीरियलों में अभिनय व हम पाँच के कुछ एपिसोड का लेखन। देशभर के कवि-सम्मेलनों में काव्य-पाठ व संचालन हेतु निरन्तर सक्रिय। सम्भान : मध्यप्रदेश मित्र संघ मुम्बई द्वारा 'युवामश्री सम्मान 2000' एवं अनेक छोटे-बड़े सम्मान। अन्य : समय-समय पर आकाशवाणी व दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रमों का संचालन। सम्पर्क : वार्ड नं.-4, थाना पारा, बागबहारा, जिला-महासमन्द-493449 (छत्तीसगढ़) दूरभाष : 09967483565 ई-मेल : ajayatparu@gmail.com

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