HAVVA KI BETIYON KI DASTAN DARDJA

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-448-0

Author:JAISHREE ROY

Pages:198


MRP : Rs. 295/-

Stock:In Stock

Rs. 295/-

Details

हव्वा की बेटियों की दास्तान दर्दजा

Additional Information

जयश्री रॉय की कृति ‘दर्दजा’ के पृष्ठों पर एक ऐसे संघर्ष की ख़ून और तकलीफ़ में डूबी हुई गाथा दर्ज है जो अफ़्रीका के 28 देशों के साथ-साथ मध्य-पूर्व के कुछ देशों और मध्य व दक्षिण अमेरिका के कुछ जातीय समुदायों की करोड़ों स्त्रियों द्वारा फ़ीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफ़जीएम या औरतों की सुन्नत) की कुप्रथा के ख़िलाफ़ किया जा रहा है। स्त्री की सुन्नत का मतलब है उसके यौनांग के बाहरी हिस्से (भगनासा समेत उसके बाहरी ओष्ठ) को काट कर सिल देना, ताकि उसकी नैसर्गिक कामेच्छा को पूरी तरह से नियन्त्रिात करके उसे महज़ बच्चा पैदा करने वाली मशीन में बदला जा सके। धर्म, परम्परा और सेक्शुअलिटी के जटिल धरातल पर चल रही इस लड़ाई में विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनेस्को जैसी विश्व-संस्थाओं की सक्रिय हिस्सेदारी तो है ही, सत्तर के दशक में प्रकाशित होस्किन रिपोर्ट के बाद से नारीवादी आन्दोलन और उसके रैडिकल विमर्श ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। अपनी समाज-वैज्ञानिक विषय-वस्तु के बावजूद प्रथम पुरुष में रची गयी जयश्री रॉय की कलात्मक आख्यानधर्मिता ने स्त्री की इस जद्दोज़हद को प्रकृति के ऊपर किये जा रहे अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह का रूप दे दिया है। सुन्नत की भीषण यातना से गुज़र चुकी माहरा अपनी बेटी मासा को उसी तरह की त्रासदी से बचाने के लिए पितृसत्ता द्वारा थोपी गयी सभी सीमाओं का उल्लंघन करती है। अफ़्रीका के जंगलों और रेगिस्तानों की बेरहम ज़मीन पर सदियों से दौड़ते हुए माहरा और मासा के अवज्ञाकारी क़दम अपने पीछे मुक्ति के निशान छोड़ते चले जाते हैं। माहरा की बग़ावती चीख़ एक बेलिबास रूह के क़लाम की तरह है। हमारे कानों में गूँजते हुए वह एक ऐसे समय तक पहुँचने का उपक्रम करती है जिसमें कैक्टस अपने खिलने के लिए माक़ूल मौसम का मोहताज़ नहीं रहता। —अभय कुमार दुबे निदेशक, भारतीय भाषा कार्यक्रम, विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस) दिल्ली

About the writer

JAISHREE ROY

JAISHREE ROY जयश्री रॉय परिचय जन्म : 18 मई, हजारीबाग (बिहार) भाषा : हिंदी विधाएँ : उपन्यास, कहानी, कविता सम्मान युवाकथा सम्मान (सोनभद्र - 2012) संपर्क तीन माड, मायना, शिवोली, गोवा - 403 517

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Shantanu Tiwari

Hawa ki Betiyon
Excellent story telling. Came to know the reality of women and the pains they go through. Very touching.
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