Wah Jiyegi Abhi

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-982-3

Author:RAMNIKA GUPTA

Pages:116

MRP:Rs.295/-

Stock:Out of Stock

Rs.295/-

Details

वह जियेगी अभी

Additional Information

इन कहानियों में जहाँ स्त्री का वह नया चेहरा उभरा, जो पहचान से बाहर हाशिये में था वहीं वह चेहरा भी उभरा, जिसकी आहट भविष्य सुन रहा है, जिसकी बाट स्त्री जोह रही है। यह कथाकार का माद्दा है कि उसने हाशिये में सदियों से पड़े स्त्री के चेहरे को सामाजिक, साहित्यिक, राजनीतिक विचार के केन्द्र में लाकर खड़ा किया। इन कहानियों में समय, समाज, जाति, धर्म, वर्ग, वर्ण और व्यवस्था के वर्चस्ववादी मकड़जाल में मक्खी की तरह उलझी-पुलझी और पिस-चुट रही औरत की छटपटाहट, तो कहीं इस सबके विरोध में जलती हुई मशाल की तरह उसका लपलपाता आक्रोश और वर्जनाओं और संस्कारों के दोराहों-चौराहों के बीच अपनी राह खोजता संकल्प - देखते ही बनता है। इन कहानियों की भाषा, शब्द और भाषिक प्रवाहमयता, कहानी कला के बरक्स न चल कर, उस स्त्राी जीवन के बरक्स चलती है, जिससे निकलने के लिए स्त्री छटपटाती रही है। ‘वह जियेगी अभी’, ‘मिथक ढह गया’, ‘एक नयी मेनका’, ‘ओह ये नीली आँखें’, ‘गुड़िया’, और ‘बिसात’ कहानियों में आप उसकी गति की तीव्रता महसूस कर सकते हैं।

About the writer

RAMNIKA GUPTA

RAMNIKA GUPTA रमणिका गुप्ता जन्म: 22 अप्रैल, 1930, सुनाम (पंजाब) शिक्षा: एम.ए., बी.एड. बिहार/झारखंड की पूर्व विधायक एवं विधान परिषद् की पूर्व सदस्य। कई गैर-सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से सम्बद्ध तथा सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक कार्यक्रमांे में सहभागिता। आदिवासी, दलित महिलाओं व वंचितों के लिए कार्यरत। कई देशों की यात्राएँ। विभिन्न सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित कृतियाँ: निज घरे परदेसी, सांप्रदायिकता के बदलते चेहरे (स्त्राी-विमर्श)। आदिवासी स्वर: नयी शताब्दी (सम्पादन)। इसके अलावा छह काव्य-संग्रह, चार कहानी-संग्रह एवं तैंतीस विभिन्न भाषाओं के साहित्य की प्रतिनिधि रचनाओं के अतिरिक्त ‘आदिवासी: शौर्य एवं विद्रोह’ (झारखंड), ‘आदिवासी: सृजन मिथक एवं अन्य लोककथाएँ’ (झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और अंडमान-निकोबार) का संकलन-सम्पादन। अनुवाद: शरणकुमार लिंबाले की पुस्तक ‘दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्रा’ का मराठी से हिन्दी में अनुवाद। इनके उपन्यास ‘मौसी’ का अनुवाद तेलुगु में ‘पिन्नी’ नाम से और पंजाबी में ‘मासी’ नाम से हो चुका है। ज़हीर गाजीपुरी द्वारा उर्दू में अनूदित इनका कविता-संकलन ‘कैसे करोगे तकसीम तवारीख को’ प्रकाशित। इनकी कविताओं का पंजाबी अनुवाद बलवरी चन्द्र लांगोवाल ने किया जो ‘बागी बोल’ नाम से प्रकाशित हो चुका है। आदिवासी, दलित एवं स्त्राी मुद्दों पर कुल 38 पुस्तकें सम्पादित। सम्प्रति: सन् 1985 से ‘युद्धरत आम आदमी’ (मासिक हिन्दी पत्रिका) का सम्पादन। सम्पर्क: ए-221, ग्राउंड फ्लोर, डिफेंस कॉलोनी, नयी दिल्ली-110024

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