Kanheri Guphayen

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-498-5

Author:Dr. Sumnika Sethi

Pages:198


MRP : Rs. 1250/-

Stock:In Stock

Rs. 1250/-

Details

कान्हेरी गुफ़ाएँ

Additional Information

कान्हेरी गुफ़ाएँ मुम्बई के राष्ट्रीय उद्यान में स्थित हैं। ये करीब दो हज़ार साल पुरानी हैं। ये चट्टानी पत्थर को काटकर बनायी गयी तत्कालीन निवासी बस्ती जैसी हैं। इन गुफ़ाएँओं में अप्रतिम बौद्ध प्रतिमाएँ हैं। यह बौद्ध भिक्षुओं की निवास स्थली रही है। आज जंगल के बीच यह एक सुरम्य और रोमांचकारी पर्यटनस्थल के रूप में विख्यात है। डॉ. सुमनिका सेठी ने इस पुस्तक में इन गुफ़ाएँओं का रोचक और विद्वत्तापूर्ण अध्ययन किया है। सामान्य पाठक के लिए यह एक रोचक, रोमांचक, ऐतिहासिक, कलात्मक अतीत यात्रा है। विषय के जानकार पाठक के लिए यह एक बहु-परतीय सौन्दर्यशास्त्रीय अध्ययन है। पुस्तक के पहले खंड में बौद्ध धर्म का इतिहास और उसके दर्शन एवं कला का परिचय पाठक के लिए एक पूर्व पीठिका का काम करता है, क्योंकि गुफ़ाएँओं का सम्बन्ध बौद्ध धर्म से है। इस खंड से इस समुदाय की बौद्धिक, मानसिक और आत्मिक वृत्ति का पता चलता है। अष्ट बुद्धों की पांत दूसरा खंड कान्हेरी की गुफ़ाएँओं पर केन्द्रित है। इसमें इन गुफ़ाएँओं के निर्माण एवं रचना-प्रक्रिया, ऐतिहासिक सन्दर्भों और प्रतिमाओं का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन मूर्तियों की विशिष्ट भाषा को हमारे सामने रखता है। इसमें तत्कालीन जीवन के विविध आयाम भी खुलते जाते हैं। धार्मिक आस्थाएँ और विचार-सरणियाँ भी मूर्त हो जाती हैं। चट्टानों में गुहाओं को कोरने की परम्परा भारत में ही नहीं, एशिया और यूरोप तक फैली है। कान्हेरी की यह बौद्ध बस्ती पश्चिमी भारत के अनेक गुहा समूहों का एक हिस्सा है। श्रावस्ती चमत्कार में कमल एवं कलिकाएँ इसमें बौद्ध धर्म के इतिहास के तीनों चरण दिख जाते हैं। इन प्रतिमाओं की शैलियाँ हों, पारम्परिक गाथाएँ हों, शिल्पकार की रचनात्मक उद्विग्नता हो, प्रतिमाओं के रूप सौन्दर्य, साज-सज्जा, वस्त्रभूषण, केश-विन्यास से मुखरित होती कथाएँ और व्याख्याएँ हों, सब कुछ मिलकर एक प्राचीन काल खंड यहाँ साकार हो उठता है। लेखिका का सौन्दर्यबोधशास्त्रीय दृष्टिकोण इस अध्ययन को समाज-कला-सांस्कृतिक अध्ययन में बदल देता है। अर्थात यह पुस्तक न निरा दर्शन है, न निरा इतिहास और न ही निरी कला-मीमांसा। बहुआयामी सौन्दर्यबोधशास्त्र इसका आधार है। इसमें न जाने कितने चिन्तकों और कला मर्मज्ञों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष योगदान है। यह सब मिलकर इसे संग्रहणीय पुस्तक बनाते हैं। हिन्दी में इस पुस्तक का स्वागत है। कहना न होगा कि ऐसी और पुस्तकों की हिन्दी को जरूरत है।

About the writer

Dr. Sumnika Sethi

Dr. Sumnika Sethi दो दशकों से मुम्बई में अध्यापन। पंजाब में संघोल की खुदाई में मिली यक्षी प्रतिमाओं का साहित्य और संस्कृति के सन्दर्भ में अध्ययन। मुक्तिबोध की क्लासिक कविता ‘अंधेरे में’ पर हुई व्याख्याओं पर एक पुस्तक। समीक्षा कार्य एवं कला अनुवाद में संलग्न।

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