Stree-Purush: Kuchh Punarvichar

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-81436-54-2

Author:RAJ KISHORE

Pages:156

MRP:Rs.395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

स्त्री-पुरुष कुछ पुनर्विचार

Additional Information

स्त्री-पुरुष सम्बन्ध जितने प्राकृतिक हैं, उतने ही सांस्कृतिक और सम्भवतः उससे भी ज़्यादा राजनीतिक इनके रचाव में जितना सुख है, उतनी ही पीड़ा इस द्वन्द्वात्मकता का उत्स कहाँ है? क्या यह दो अजनबियों का ऐसा नरक है जिसे स्वर्ग में बदला नहीं जा सकता? या, सुख नैसर्गिक है और दुख संस्कृति द्वारा प्रदत्त? स्त्री की दासता के तन्तु कहाँ से शुरू होते हैं और उसकी स्वाधीनता कहाँ तक जा सकती है? इस बारे में साहित्यिक साक्ष्य क्या कहते हैं? शीर्षस्थ पत्रकार एवं प्रखर विचारक राजकिशोर ने यहाँ एक ऐसे विषय पर क़लम चलायी है, जिस पर हिन्दी में बहुत कम लिखा गया है और जो लिखा गया है, उसमें से ज़्यादातर को निकृष्ट को कोटि में ही रखा जा सकता है। दिलचस्प यह है कि यह विवेचन जितना शास्त्रीय है उतना ही मार्मिक तथ्यों और आँकड़ों से मुठभेड़ करते हुए राजकिशोर स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के उस धरातल की व्यापक छानबीन करते हैं जो दोनों की जीवन व्यवस्था के प्रायः सभी पहलुओं को स्पर्श करता है। पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी सुन्दर, प्रांजल और विचारवान भाषा, जो सत्य के उद्घाटन को रसमय बनाते हुए भी तार्किकता से अपना अटूट रिश्ता बनाये रखती है। यह भाषा दृष्टि की उस व्यापकता के कारण ही सम्भव हुई है जो स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की इस छानबीन को सभ्यता के विमर्श का एक आवश्यक अंग मानती है और उनकी पुनर्रचना के सुन्दर तथा उदात्त स्वप्न से परिचालित है।

About the writer

RAJ KISHORE

RAJ KISHORE राजकिशोर 2 जनवरी 1947 को कलकत्ता में जन्म। शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), एलएल.बी. तथा बी. कॉम. (ऑनस)। पत्रकारिता की शुरुआत अगस्त 1977 में आनंद बाजार पत्रिका समूह, कलकत्ता द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक 'रविवार' से। 1986-87 में साप्ताहिक 'परिवर्तन' का संपादन किया। 1987 से 1990 तक 'रविवार' के संयुक्त संपादक। 1990 से 1996 तक नवभारत टाइम्स, दिल्ली में वरिष्ठ सहायक संपादक। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हजारों लेख प्रकाशित हो चुके हैं। मुख्यतः राजनीति, समाज एवं आर्थिक विषयों पर लेखन। संप्रति प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की त्रैमासिक पत्रिका 'विदुर' के संयुक्त संपादक। अन्य प्रकाशन : पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य, आजादी एक अधूरा शब्द है, स्त्री-पुरुष : कुछ पुनर्विचार, धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति, हिन्दी लेखक और उसका समाज, जाति कौन तोड़ेगा तथा तुम्हारा सुख (उपन्यास)। संपादन : समकालीन पत्रकारिता : मूल्यांकन और मुद्दे। सह-संपादन : मुसलमान क्या सोचते हैं। लोकप्रिय पुस्तक श्रृंखला ‘आज के प्रश्न' के संपादक, जिसके अंतर्गत अब तक 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पुरस्कार और सम्मान : पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1988 में लोहिया पुरस्कार, 1990 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान तथा 1995 में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, बिहार द्वारा राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता पुरस्कार। 1996 में मध्य प्रदेश सरकार की राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता फेलोशिप।

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