Doosaree Parampara Ka Shukl-Paksh

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-844-4

Author:Kamlesh Verma, Suchitra Verma

Pages:220

MRP:Rs.495/-

Stock:In Stock

Rs.495/-

Details

No Details Available

Additional Information

सैद्धांतिक और व्यावहारिक आलोचना के संतुलन की जो परंपरा आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने शुरू की थी वह विचारधारा के दबाव अथवा रूपवादी प्रयास के कारण दूसरी राह पर चली गयी थी। बाद के आलोचक शुक्लजी की उस नसीहत को भूल गये कि साहित्य की अपनी ‘मूल सत्ता’ होती है। सभ्यता ऊपरी आवरण है जिसे समझना तो ज़रूरी है मगर उसी में डूब जाना ठीक नहीं है। आलोचना को अंततः साहित्य के सवालों और समस्याओं से जुड़ना है इसलिए साहित्य का मूलाधार अच रहना चाहिए। दूसरी परंपरा में होने के बावजूद मैनेजर पाण्डेय ने साहित्य के मूल स्वरूप को आत्मसात कर उसके क्रमबद्ध विवेचन का प्रयास किया है।

About the writer

Kamlesh Verma, Suchitra Verma

Kamlesh Verma, Suchitra Verma

Books by Kamlesh Verma, Suchitra Verma

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality