Itwar Chhota Pad Gaya

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-435-7

Author:Pratap Somvanshi

Pages:144


MRP : Rs. 150/-

Stock:In Stock

Rs. 150/-

Details

इतवार छोटा पड़ गया

Additional Information

राम तुम्हारे युग का रावण अच्छा था दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था इतिहास जब वर्तमान से सन्दर्भ ग्रहण करता है तो एक ऐसा शे'र होता है, जो अपने समय का मुहावरा बन जाता है। प्रताप सोमवंशी का यह शे'र कुछ उसी तरह से आम-अवाम का हो चुका है। प्रताप के कुछ और अश्आर को सामने रखकर देखें कि हमारा कवि हमें अपने निजी अनुभवों में कहाँ तक शरीक कर पाता है। कवि द्वारा कही गयी बात जब हमें अपने मन की बात महसूस होती है तो यह उसकी सफलता की पराकाष्ठा होती है। आज हम इतना व्यस्त जीवन गुजारते हैं या गुजारने को मजबूर हैं कि बिना ज़रूरत के अपने सगे-सम्बन्धियों, मित्रों और शुभचिन्तकों तक से मिलने की फुर्सत नहीं निकाल पाते। इस विचार को कैसी ख़ूबसूरती से शेर का रूप दिया है कवि ने- मिलने की तुझसे कोई तो सूरत बची रहे बेहतर है दोनों ओर ज़रूरत बची रहे तहज़ीबी तरक्की की बुलन्दियों पर पहुँच कर भी हमने अपनी आधी आबादी को किस हाल में रख छोड़ा है इसका छोटा-सा उदाहरण देकर कवि हमें अन्दर तक झकझोर कर रख देता है। यह जो इक लड़की पे हैं तैनात पहरेदार सौ देखती हैं उसकी आँखें भेड़िए खूंख़ार सौ प्रताप का एक इन्तिहाई ख़ूबसूरत शे'र मैं ख़ासतौर से पेश करना चाहता हूँ कि उसके आइने में मुझे स्वयं कवि का प्रतिबिम्ब भी नज़र आता है। शे'र यों है कैसे कह पाता कोई, किरदार छोटा पड़ गया जब कहानी में लिखा अख़बार छोटा पड़ गया आज जो कुछ प्रताप सोमवंशी हैं वो तो हैं ही, मुझे उनका वह रूप याद आ रहा है जब वो मुझसे लगभग पच्चीस वर्ष पहले ‘होनहार बिरबान के होत चीकने पात' की व्याख्या बनकर मिले थे। और कोई तफ़सील तो नहीं बता सकता लेकिन इतना ज़रूर याद है कि एक शालीन और गम्भीर नौजवान मुझे मिला था और पहली ही नज़र में आँख के रास्ते से सीधे मेरे दिल में उतर गया था। मैंने उस नौजवान में एक समर्थ ग़ज़लकार होने की सम्भावना उसी समय देख ली थी। -एहतराम इस्लाम

About the writer

Pratap Somvanshi

Pratap Somvanshi जन्म-20 दिसंबर 1968 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में। इलाहाबाद में शिक्षा-दीक्षा। इस समय अमर उजाला हिंदी दैनिक के कानपुर संस्करण में स्थानीय संपादक। पत्रकारिता में पिछले 18 बरसों से सक्रिय। दक्षिण एशियाई मीडिया फेलोशिप के तहत वषॆ 1999 में बुंदेलखंड के सिलिका खनन क्षेत्रों की महिलाओं पर अध्ययन। औरत और धरती का साझा दुख। जनसत्ता, दैनिक भास्कर, वेबदुनिया डाट काम में विभिन्न पदों पर रहे। चित्रकूट पर एक वृत्त-चित्र का निर्देशन। रेडियो के लिए कई लघु नाटिकाएं लिखीं। कविताओं का कन्नड़, बांग्ला, उर्दू में अनुवाद। अनौपचारिक शिक्षा, वन्य जीवन और बच्चों के लिए कई किताबें प्रकाशित। अनौपचारिक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम निर्धारण में विशेषज के तौर पर शामिल। 50 से अधिक पाठ्यक्रम आधारित पुस्तक और प्रवेशिकाओं के रचना मंडल में शामिल।

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