Ismat Aapa

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-092-2

Author:Sukrita Paul Kumar

Pages:318


MRP : Rs. 895/-

Stock:In Stock

Rs. 895/-

Details

​इस्मत आपा ​

Additional Information

मशहूर और हर दिल अज़ीज़ अफ़सानानिगार इस्मत चुग़ताई के प्यार और सम्मान का नाम है 'इस्मत आपा' और यही इस किताब का भी नाम है। पाठक इस किताब को इस्मत चुगताई के अदबी संसार की एक झाँकी के रूप में देख भी सकते हैं। 'इस्मत आपा' में इस्मत के अदबी संसार के बेहतरीन नमूने हैं अफ़साने हैं, गैर अफ़सानवी नस्र हैं, बक़लम ख़ुद है और उन्हीं के लफ़्ज़ों में उनका सिनेमाई सफ़र भी दर्ज है। यानी इस किताब में आप इस्मत के चुनिन्दा अफ़साने तो पढ़ेंगे ही, यह भी पढ़ेंगे कि ख़ुद इस्मत उन अफ़सानों को कैसे पढ़ती हैं या अपनी चीजों को देखने का उनका नज़रिया क्या है। किताब के आख़िर में इस्मत के चुनिन्दा ख़तूत और डायरियाँ भी हैं जो आपके पढ़ने के लुत्फ़ को बढ़ायेंगी। यहाँ इस्मत के अफ़साने, फ़न और किरदार पर मुक़म्मल लेख तो हैं ही, इस्मत को याद करते हुए उनकी शख़्सियत और मिज़ाज़ पर अपने जमाने की नामचीन अदीबों की यादें और लेख भी पढ़ने को मिलेंगे। ये यादें बहुत करीने से संजोकर रखे गए कतरनों को मिलाकर बनायी गयी हैं और ये तमाम लेख बहुत दिल लगाकर लिखे गए हैं। कुछ लेखों को बहुत मेहनत से तर्जुमा करके हिन्दी में पहली बार नयी-नवेली बनाकर लाया गया है। सम्पादकों ने न जाने कहाँ-कहाँ। की ख़ाक छानकर धूल फाँकती हुई पत्र-पत्रिकाओं में। छिपे हुए दूभर खज़ाने को आपके लिए ढूँढ निकाला है। किताब में संकलित छोटी-बड़ी रचनाएँ गोया हीरे के। छोटे-बड़े टुकड़े हैं जिनसे पूरी किताब जगर-मगर करती। है। इनसे आपकी आँखें ज़रूर चौधाएँगी लेकिन उनमें जलन नहीं होगी, मगर बहुत दूर तक मुसलसल आगे। बढ़ते रहने के लिए हौसला और रोशनी मिलेगी। इस किताब के बहाने आपके सामने इस्मत के अदबी। समय का एक दरीचा खुलता चला जाएगा। हिन्दी में। पहली बार इस्मत के बारे में किसी एक किताब में इतना सबकुछ एक साथ! इस्मत के सौ साल पूरे होने की। मुबारक घड़ी में वाणी प्रकाशन की ख़ास सौगात!

About the writer

Sukrita Paul Kumar

Sukrita Paul Kumar कवि, शिक्षक, आलोचक, सम्पादक व अनुवादक सुकृता पॉल कुमार भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य की प्रतिष्ठित पहचान हैं। उनकी कविता का कैनवस, परिवेश और यथार्थ के साथ मानवीय अनुभव से जुड़े बड़े सवालों, प्रकृति के विराट में एकलय होते मानवीय अस्तित्व, रिश्तों की प्रगाढ़ता, स्त्री के नैसर्गिक रूप के अद्भुत बिम्ब, बेघरों के जीवन संघर्षों के ब्योरे और भी बहुत-सी छोटी-बड़ी बातों से रचा गया है। उनके प्रमुख कविता संग्रह हैं - ‘विदआउट मर्जिंस’, ‘अपूर्ण’, ‘ड्रीम कैचर’, ‘ऑसिलेशन्स’, ‘अनटाइटल्ड’ आदि। गुलज़ार ने उनकी कविताओं के अनुवाद ‘पोएम्स कम होम’ शीर्षक से किये हैं। सविता सिंह के साथ उनकी कविताओं की द्विभाषी प्रस्तुति ‘साथ चलते हुए’ में हुई है। आलोचना के क्षेत्र में ‘नरेटिंग पार्टीशन’ तथा ‘इस्मत आपा’ विशेष उल्लेखनीय हैं। उनके द्वारा किये अनुवादों में प्रमुख हैं ‘ब्लाइंड’ (जोगिन्दर पॉल का उपन्यास नादीद) तथा ‘न्यूड’ (विशाल भारद्वाज की कविताएँ)। International Writing Programme, IOWA में तीन माह की अवधि की लेखन कार्यशाला में सुकृता को कवि रूप में आमन्त्रित किया गया। उन्हें अनेक फ़ेलोलोशिप मिले हैं जिनमें शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान का तथा भारतीय संस्कृति मन्त्रालय का टैगोर फ़ेलोशिप उल्लेखनीय हैं। वे अभी हाल तक दिल्ली विश्वविद्यालय के अरुणा आसफ़ अली चेयर पर पदासीन रही हैं।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality