Sanskritik Patrakarta: Sakshatkar Par Adharit Sannate Mein Chamakti Aawazen

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-456-9

Author:Ajit Rai

Pages:112

MRP:Rs.275/-

Stock:In Stock

Rs.275/-

Details

सांस्कृतिक पत्रकारिता : साक्षात्कार पर आधारित सन्नाटे में चमकती आवाज़ें

Additional Information

अख़बारों में प्रतिदिन महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों और ख़बरों में रहने वाले सेलेब्रेटीज के साक्षात्कार पर आधारित खबरें छपती रहती हैं। इनमें से अधिकतर तो जाने-पहचाने क़िस्म के बयान होते हैं, कुछ माँगें या उपदेश होते हैं, कुछ विवादास्पद बयान होते हैं, कुछ पूर्व में दिये गये साक्षात्कारों का खंडन होता है। बहुत कम ख़बरें ऐसी होती हैं जो गम्भीर या लोकप्रिय विमर्श पैदा करती हैं। यदि किसी लेखक-कलाकार पर सरकारी या गैर-सरकारी हमला होता है, या उन्हें किसी पद पर बिठाया या हटाया जाता है या और भी कुछ ऐसा तात्कालिक घटता है तो ऐसे बयानों-साक्षात्कारों की बहुतायत देखी जाती है। आज अख़बार सतही साक्षात्कारों से भरे पड़े हैं। इसलिए अख़बारों में अच्छे साक्षात्कारों की माँग बनी हुई है। अवसर विशेष पर संक्षिप्त और तात्कालिक साक्षात्कारों की भी माँग होती है। लेकिन साक्षात्कार चूँकि द्विपक्षीय प्रक्रिया है इसलिए उसकी गुणवत्ता साक्षात्कार देने वाले और साक्षात्कार लेने वाले दोनों पर निर्भर करती है। ऐसा देखा गया है कि साक्षात्कार की गुणवत्ता अक्सर साक्षात्कार लेने वाले पत्रकार की क्षमता और कौशल पर निर्भर करती है। दुर्भाग्य से साहित्य और संस्कृति की दुनिया में हलचल मचाने वाले महत्त्वपूर्ण साक्षात्कार कम ही छपते हैं। ऐसे परिदृश्य में प्रस्तुत पुस्तक को एक अपवाद कहा जा सकता है। यहाँ समकालीन साहित्यिकसांस्कृतिक परिवेश के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षरों के आत्मीय साक्षात्कार संकलित किये गये हैं। ये साक्षात्कार अपनी मूल प्रकृति में जीवन्त संवाद की तरह हैं जिनमें साक्षात्कार देने वाले व्यक्ति का संवादी व्यक्तित्व साफ़-साफ़ उभर कर सामने आया है। यहाँ साक्षात्कार को एक गम्भीर सांस्कृतिक कर्म मानते हुए उसके व्यावहारिक आशयों को उजागर करने की कोशिश की गयी है। इस प्रक्रिया में संकोच, झिझक और गोपन की बजाय मुखरता, स्पष्टता और बेबाकी को तरजीह दी गयी है जिसके कारण खुद यह किताब भी एक बोलती हुई किताब बन गयी है।

About the writer

Ajit Rai

Ajit Rai अजित राय जन्म : 01 अक्टूबर 1967 शिक्षा : मनोविज्ञान के अलावा पत्रकारिता और जनसंचार में उच्च शिक्षा। अजित राय देश के उन गिने-चुने साहित्यिकसांस्कृतिक पत्रकारों में से हैं जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में लगभग सभी महत्त्वपूर्ण अख़बारों-पत्रिकाओं एवं रेडियो-टेलीविज़न में साहित्य, रंगमंच, सिनेमा और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लगातार लेखन किया है। वे सच्चे अर्थों में एक अन्तरराष्ट्रीय पत्रकार हैं जिन्होंने पिछले दस वर्षों में दुनिया भर में साहित्य, संस्कृति, रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में घटित होने वाली तमाम महत्त्वपूर्ण गतिविधियों की रिपोर्टिंग से हिन्दी संसार को परिचित कराया है। अजित राय ने पिछले लगभग दो दशकों से विभिन्न समाचार-पत्रों के लिए काम किया है। वे 'हंस' के संस्कति सम्पादक और 'दृश्यान्तर' के सम्पादक रहे हैं। 'जिस लाहौर नइ देख्या...' पर एक पुस्तक प्रकाशित लगभग पन्द्रह पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं। विशेष : नोबेल पुरस्कार समारोह में कई बार आमन्त्रित, कान फ़िल्म समारोह (फ्रांस) में लगातार चार बार भागीदारी, अन्तरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह (गोवा) की प्रतिष्ठित चयन समिति (ज्यूरी) में भी अनेक बार मनोनीत, कालिदास सम्मान एवं 'भारत रंग महोत्सव' की ज्यूरी में सदस्य और वर्ष 2012 में बर्लिन (जर्मनी) में आयोजित प्रथम भारतीय फ़िल्म समारोह के निदेशक। सम्प्रति : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पत्रिका 'रंग-प्रसंग' के अतिथि सम्पादक। सम्पर्क : फ्लैट नं. 4 (अपर ग्राउंड), एस-21, खिड़की एक्सटेंशन, मालवीय नगर, नयी दिल्ली-110017 मोबाइल : 9818558871 ई-मेल : ajitraieditor@gmail.com

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