Meri Jail Yatra:Ek Kahani

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-661-3

Author:Sanjay Mohan

Pages:160


MRP : Rs. 150/-

Stock:In Stock

Rs. 150/-

Details

मेरी जेल यात्रा एक कहानी

Additional Information

आप सोच रहे होंगे कि अचानक 50 वर्षों बाद मुझे लेखक बनने की आवश्यकता क्यों आन पड़ी? आपको यह जानकर कदाचित् आश्चर्य होगा कि इस पुस्तक के लेखन का कार्य मेरे द्वारा जिला कारागार लखनऊ की एक बैरक में विचाराधीन बन्दी के रूप में एक फट्टे (फर्श पर बिछे बिस्तर) पर बैठकर प्रारम्भ किया गया था। इस बैरक में मेरे अगल-बगल अपने-अपने फट्टे पर विराजमान अन्य बन्दी थे जो प्रथम दृष्टया सर्प एवं नाग जैसे दिखते थे। इनके साथ कुछ दिन रहने के बाद पता चलता है कि इनमें से कुछ बेहद विषैले, कुछ विषैले और कुछ पानी वाले हैं। पुलिस की बर्बरता और सिस्टम की खामियों की वजह से अनेक निर्धन मासूम निर्दोष बन्दी भी थे जिनकी संख्या सबसे अधिक थी। इस पुस्तक में मेरी जेल यात्रा का जो वर्णन आपको पढ़ने को मिलेगा उसको पढ़कर आपको मेरी वेदना की अनुभूति होगी। मेरी व मेरे परिवार की यही वेदना इस पुस्तक के लिखने का कारण बनी। इस पुस्तक का लेखन मेरी विवशता बन गया था क्योंकि राजनीतिक विद्वेष और मेरे विरुद्ध कूटरचित ढंग से रचे गये षड्यन्त्रों ने मेरे तथा मेरे परिवार को नेस्तनाबूद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मेरी इस जेल यात्रा की कहानी में आपको यह पढ़ने को मिलेगा कि राजनेताओं के इशारों पर पुलिस द्वारा मेरे व मेरे परिवार के साथ जो बर्बरतापूर्ण व्यवहार और अत्याचार किया गया वह एक भयानक त्रासदी से कम न था। पुलिस इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी के नेतृत्व में बार-बार मेरे घर में घुसकर महिलाओं को धमकाने और अपमानित करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। रात में दो बजे घर की घंटी बजती थी तो पता चलता था निशातगंज चौकी के पुलिस के सिपाही यह कहने आये हैं कि मेम साहब से पूछो कुछ खर्चा मिलेगा क्या? वरिष्ठ नौकरशाहों के दबाव में पुलिस का यह निरंकुश चेहरा कम से कम मेरे लिए बेहद अप्रत्याशित था। जब मेरे तथा मेरे परिवार पर लम्बे समय स हा रहे जुल्मों के कारण धैर्य ने मेरा साथ छोड़ दिया तब मैंने अपने दर्द को पुस्तक का रूप देने का निर्णय लिया।

About the writer

Sanjay Mohan

Sanjay Mohan संजय मोहन जन्म 29 अगस्त, 1952 को बरेली (उत्तर प्रदेश) में हुआ। इन्होंने स्नातक और मध्यकालीन भारतीय इतिहास में स्नातकोत्तर की शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय मथर से ग्रहण की है। 4 नवम्बर, 1976 को राज्य शैक्षिक सेवा में कार्यभार ग्रहण किया। उत्तर प्रदेश शासन के शिक्षा विभाग में जिला, मण्डल और प्रदेश स्तर के अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। विश्व बैंक तथा भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित बेसिक शिक्षा के कार्यक्रमों की संरचना और क्रियान्वयन में योगदान दिया। लीड्स - विश्वविद्यालय, इंग्लैण्ड में ‘प्रोजेक्ट मैनेजमेंट' विषयक कोर्स में प्रतिभाग किया और कोलम्बिया, दक्षिण अमेरिका में ‘न्यू स्कूल कार्यक्रम' के अध्ययन हेतु गठित भारत बलिया सरकार की टीम के सदस्य थे। वर्ष 2000 से 2012 तक उत्तर प्रदेश के निदेशक, शिक्षा के पद पर कार्यरत रहते हुए बेसिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग में निदेशक पद पर कार्य करने के साथ-साथ निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् और निदेशक, साक्षरता के पद पर भी कार्य किया।

Books by Sanjay Mohan

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality