Poorvottar Bharat Ka Janjatiya Sahitya

Format:Hard Bound

ISBN:9789352296576

Author:DR. ANUSHABDA

Pages:184


MRP : Rs. 450/-

Stock:In Stock

Rs. 450/-

Details

जनजातीय या आदिवासी साहित्य किसी असभ्य या अशिष्ट समाज का साहित्य नहीं है बल्कि हमारे पुरखों का साहित्य है| हमारे पुराने समाज का साहित्य है| इसमें जीवन के विभिन्न प्रसंगों से प्राप्त अनुभवों एवं सत्यों की वास्तविक अभिव्यक्ति होती है| इसमें भावों की अभिव्यक्ति में किसी तरह का बनावटीपन नहीं होता बल्कि भावों का भदेसपन जनजातीय साहित्य की अपनी विशेषता है|” - पुस्तक ‘पूर्वोत्तर भारत का जनजातीय इतिहास’ से पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय इतिहास को एक नए दृष्टिकोण से देखती पुस्तक|

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About the writer

DR. ANUSHABDA

DR. ANUSHABDA डॉ. अनुशब्द का जन्म स्थान बक्सर, बिहार है। इनकी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली से हुई है। इनकी अध्ययन रुचि के क्षेत्र भाषाविज्ञान, व्याकरण, पत्रकारिता एवं कविता हैं। इन्होंने 'रामविलास शर्मा की भाषाई एकता की अवधारणा' विषय पर एम. फिल. किया है तथा 'हिन्दी समाचार पत्रों में प्रकाशित कार्टूनों का समाजभाषावैज्ञानिक अध्ययन' विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। हिन्दी की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं (आलोचना, भाषा, अलाव, अपेक्षा, समवेत, समन्वय पूर्वोत्तर, समसामयिक सृजन, सामयिक मीमांसा, सहृदय, 'प्रत्यय, मूक आवाज, शब्दार्थ आदि) में इनके 'आलोचनात्मक लेख प्रकाशित होते रहे हैं। आन्ध्र प्रदेश 'सरकार की स्कूली किताबों में विषय-सलाहकार के रूप में भी इनकी भूमिका रही है। 'हिन्दी : एक मौलिक 'व्याकरण' (वाणी प्रकाशन) तथा 'एक नयी अर्थव्यवस्था की कार्यसूची' (ग्रन्थशिल्पी) शीर्षक दो 'अनूदित पुस्तकें एवं 'हिन्दी पत्रकारिता : रूपक बनाम 'मिथक' शीर्षक से एक मौलिक पुस्तक वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हो चुकी हैं। सम्प्रति : तेजपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में सहायक प्रवक्ता के पद पर कार्यरत।

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