Subha-Savere

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-621-7

Author:Hariyash Rai

Pages:136

MRP:Rs.325/-

Stock:Out of Stock

Rs.325/-

Details

सतत परिवर्तन-परिदृश्य की पटकथा है हरियश राय की कहानियाँ। आप जहाँ पाँव रखना चाहते हैं, आप हैरान रह जाते हैं कि वह जमीन तो खिसक चुकी है, पाँव कहीं और जा पडे़ हैं। हम कैसे समय में आ गये हैं। एक भँवर है जो कहीं टिकने नहीं देता, जो धरती से आकाश तक को किसी ब्लैक होल में सुड़कता जा रहा है। यहाँ न प्रतिभा की कोई प्रशंसा है, न श्रम का सम्मान। जो हमारी हर शै को नियंत्रित कर रहा है, वह कुछ और ही नियन्ता है! बाजार! पूँजी! मुनाफा! फरदीन खिलौने बनाने वाले का बेटा है। पिता अच्छा कारीगर है। अब खिलौनों का कोई खरीददार नहीं। लोगो की रुचियाँ बदल चुकी हैं, बल्कि कहा जाय बाजार ने बदल दी हैं। अब उन्हें कुछ और चाहिए खिलौने नहीं, फोटो या म्यूरल फ्रेमिंग हैं। मुनाफे या बचे रहने की चाहत, मजहबी बंदिशें भी नहीं रोक पातीं। (जहाँ मूरते कुफ्र है) फरदीन में प्रतिभा है, समझ है। वह सर्गोब्रीन बनना चाहता है, एक नये गूगल का स्रष्टा, पर गरीबों ने पाँवों में बेड़ियाँ डाल रखी हैं। यह भँवर है। उसे निगल कर किस रसातल में गर्क करेगा उसे नहीं मालूम। अन्न-जल में यह भँवर का लोभनीय चेहरा ओढ़ कर आता है सत्ता को उसी की दलाली करनी पड़ रही है। किसान और किसानी कभी समाज के मुकुट हुआ करते थे, पर अब किसान अपने पोते के जीवन-दर्शन से हार जाता है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को जमीन बेच कर पैसे निकाल लेने चाहिए जमीन में क्या रखा है? हरियश राय का दूसरा आघात बिन्दु है अंधश्रद्धा। पिछले कुछ वर्षों से श्रम, विवेक और आत्मसम्मान खोकर पढे़-लिखे नौजवान तक इस रोग की चपेट में आते जा रहे हैं। कैंसर की तरह कुछ एक पागल कोशिकाओं का रोग है यह। प्रसन्नता की बात है, हरियश राय के पात्र इस कैंसर को पहचानने लगे हैं, और इसकी कीमोथेरैपी या उपचार को भी।

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About the writer

Hariyash Rai

Hariyash Rai हरियश राय उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में प्रारम्भिक शिक्षा, 1971 के बाद की शिक्षा दिल्ली से। दो उपन्यासों नागफनी के जंगल में और मुट्ठी में बादल के अलावा छह कहानी संकलन बर्फ़ होती नदी, उधर भी सहरा, अन्तिम पड़ाव, वजूद के लिए, सुबह-सवेरे व किस मुकाम तक प्रकाशित। इसके साथ ही सामयिक विषयों से सम्बन्धित पाँच अन्य किताबें भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास, सूचना तकनीक, बाजार एवं बैंकिंग, समय के सरोकार, शिक्षा, भाषा और औपनिवेशिक दासता, तय किया मैंने सफ़र व कथा : एक यात्रा प्रकाशित। कथा-कहानी 'एक' का सम्पादन। सम्पर्क : 73, मनोचा अपार्टमेंट, एफ ब्लॉक, विकासपुरी, नयी दिल्ली-110018 ई-मेल : hariyashrai@gmail.com

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