Bhartiya Bhashon Ki Pahchan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-677-4

Author:DR. SIYARAM TIWARI

Pages:564


MRP : Rs. 1495/-

Stock:In Stock

Rs. 1495/-

Details

भारतीय भाषाओं की पहचान

Additional Information

भारत में कुल चार परिवारों की भाषाएँ बोली जाती हैं- भारोपीय, द्रविड़, ऑस्ट्रिक और तिब्बती-चीनी। भारत की वर्तमान संविधान-स्वीकृत बाईस भाषाओं में से पन्द्रह भाषाएँ भारोपीय परिवार की हैं- असमिया, उर्दू, ओड़िया, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, डोगरी, नेपाली, पंजाबी, बांगला, मराठी, मैथिली, संस्कृत, सिंधी और हिन्दी। शेष सात में से तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़, ये चार भाषाएँ द्रविड़ परिवार से सम्बन्ध रखती हैं। बोडो और मणिपुरी तिब्बती-चीनी परिवार की तथा संताली ऑस्ट्रिक परिवार की भाषा है। भारतीय भाषाओं के सबसे बड़े वर्ग को आर्य-परिवार और द्रविड़-परिवार में विभक्त करने का आधार इतिहास का यह मत है कि आर्य लोग भारत के मूल निवासी नहीं थे, वे बाहर से आये थे। कहना नहीं होगा कि यह मत अब बहुत दूर तक खण्डित हो चुका है और यह मत दिन-प्रतिदिन प्रबलतर होता जा रहा है कि आर्य लोग बाहर से नहीं आये थे। इसी के साथ भाषाविज्ञान के क्षेत्र में यह विचार सामने आने लगा है कि आर्य भाषा परिवार और द्रविड़ भाषा परिवार का पृथक्-पृथक् वर्ग मानना संगत नहीं। दक्षिण भारत की चारों भाषाओं के मूल स्त्रोत पर विद्वानों के विचारों का पर्यालोचन भी इस सम्बन्ध में उपयोगी होगा। इस सम्बन्ध में सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब यह विचार भी सामने आ रहा है कि किसी समय दक्षिण की चारों भाषाएँ एक थीं। और ऐसा ही महत्त्वपूर्ण एक तथ्य यह भी सामने आ रहा है कि ”आर्य भाषाएँ और द्रविड़ भाषाएँ दो भिन्न भाषाएँ नहीं हैं अपितु उनका विकास एक ही भाषिक स्तर पर हुआ है।“ यही नहीं, चारों भाषाओं के उद्गम की खोज करते हुए विद्वान् किसी-न-किसी रूप में संस्कृत तक ही पहुँचते हैं।

About the writer

DR. SIYARAM TIWARI

DR. SIYARAM TIWARI डॉ. सियाराम तिवारी जन्म: 5 दिसम्बर, सन् 1934 ई.। स्थान : बिहार राज्य के वैशाली (तत्कालीन मुजफ़्फ़रपुर) जिलान्तर्गत नारायणपुर बुजुर्ग नामक ग्राम जो हाज़ीपुर-महुआ रोड पर हाजीपुर से लगभग दस किलोमीटर पर अवस्थित है। शिक्षा : एम.ए. (बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर), पीएच. डी., डी.लिट्. (पटना विश्वविद्यालय)। पूर्व कार्य : विश्वभारती, शान्तिनिकेतन (प.बं.) से हिन्दी-विभागाध्यक्ष एवं मानविकी तथा समाजविज्ञान संकायाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त; हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद में अतिथि आचार्य; हंगेरियन युनिवर्सिटी ऑफ़ ट्रैसिलवेनिया (रोमानिया) में अतिथि आचार्य; नालन्दा खुला विश्वविद्यालय, पटना में भाषा-संकाय के मुख्य समन्वयक। प्रकाशित कृतियाँ : हिन्दी के मध्यकालीन खंडकाव्य (दिल्ली, 1964); बज्जिका भाषा और साहित्य (पटना, 1964); हलधरदासकृत सुदामाचरित्र (पटना, 1966); सिद्धान्त, अध्ययन और समस्याएँ (पटना, 1967); काव्यभाषा (नयी दिल्ली, 1976); साहित्यशास्त्र और काव्यभाषा (साहिबाबाद, 1978); रेणु : कर्तृत्व और कृतियाँ (पटना, 1983); तुलसीदास का आचार्यत्व (नयी दिल्ली, 1985); पाठानुसन्धान (इलाहाबाद, 1987); नन्दलाल बोस (नयी दिल्ली, 1991); साहित्य और हिन्दी-साहित्य (पटना, 1992); मंझन (नयी दिल्ली, 1998); जानकीवल्लभ शास्त्री : कर्तृत्व और कृतियाँ (इलाहाबाद, 1998); आनन्द शंकर माधवन की सारस्वत साधना (मंदार विद्यापीठ, 1999); चिन्तन की रेखाएँ (दिल्ली, 2003); हिन्दी-साहित्य : भाषिक परिदृश्य (दिल्ली, 2005); सुनि आचरज करै जनि कोई (नयी दिल्ली, 2008); भारतीय साहित्य की पहचान (पटना, 2009); रोमानिया-यात्रा की 'डायरी, (अहमदाबाद, 2009); पाटलिपुत्र से शान्तिनिकेतन (दरभंगा, 2011); शैलेश मटियानी के पत्र (दिल्ली, 2013); 'महामानव रवीन्द्रनाथ और अन्य निबन्ध (दिल्ली, 2013)। सम्पर्क : एन-2, प्रोफेसर कॉलोनी, कंकड़बाग, पोस्ट-लोहिया नगर, पटना-800020 दूरभाष : 08809941431, 09431808456

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