Stree-Prashn

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5229-678-1

Author:Namita Singh

Pages:252

MRP:Rs.250/-

Stock:In Stock

Rs.250/-

Details

आज इक्कीसवीं सदी में भी स्त्री-प्रश्न बरकरार हैं | पुनरुत्थानवादी मानसिकता उपयुक्त राजनीतिक माहौल में फिर पल्लवित होने लगती है | धर्म, सम्प्रदाय और जाति की राजनीति में जो वातावरण तैयार होता है उसका शिकार भी सर्वाधिक महिलाएँ होती हैं| इस पुस्तक में स्त्रीवाद से सम्बन्धित सवालों को उठाते हुए सिर्फ अकादमिक अध्ययन ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच काम करते हुए प्राप्त होने वाले व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर चर्चा की गयी है | समाज के विभिन्न वर्ग और समुदायों की स्थितियों को भी इसमें सम्मिलित करने का प्रयास किया है|

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About the writer

Namita Singh

Namita Singh नमिता सिंह जन्म: लखनऊ शिक्षा : एम.एससी., पीएच.डी. टीकाराम गर्ल्स डिग्री कालेज, अलीगढ़ में लगभग 40 वर्ष अध्यापन। 2005 में रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष और प्राचार्या पद सँभालने के बाद सेवानिवृत्त। नमिता सिंह कृतियाँ : खुले आकाश के नीचे, राजा का चौक, नील गाय की आँखें, जंगल गाथा, निकम्मा लड़का, मिशन जंगल और गिनीपिग, उत्सव के रंग (कहानी संग्रह); कर्फ़्यू तथा अन्य कहानियाँ (चयनित कहानियाँ); अपनी सलीबें, लेडीज़ क्लब (उपन्यास); दिव्या : इतिहास, संस्कृति और स्त्री-विमर्श, 1857 और जन-प्रतिरोध (सम्पादित); हाँ! मैंने कहा... (साक्षात्कार)। फ़सादात की लायानियत (उर्दू में कहानी संग्रह) अनु. डॉ. सीमा सगीर। सम्पादन : 'वर्तमान साहित्य' पत्रिका, 2004-2014 तक। डॉ. नमिता सिंह का कथा-साहित्य-डॉ. शमा परवीन (2003)। नमिता सिंह और उनका रचना-संसार-डॉ. सुरुचि मिश्रा (2014)। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जनवादी लेखक संघ। अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश जनवादी लेखक संघ। अध्यक्ष, ज्ञान-विज्ञान समिति उत्तर प्रदेश। सचिव, महिला सहायक संघ एवं परिवार परामर्श केन्द्र, अलीगढ़ (समाज कल्याण बोर्ड से सम्बद्ध)। अध्यक्ष, के.पी. सिंह मेमोरियल चेरीटेबल ट्रस्ट।

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