KHANTI GHARELU AURAT

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-108-1

Author:MAMTA KALIA

Pages:


MRP : Rs. 150/-

Stock:Out of Stock

Rs. 150/-

Details

खाँटी घरेलू औरत

Additional Information

एक लेखक का रचाव और सृजन-माटी जिन तत्वों से बनती है उनमें गद्य, पद्य और नाट्य की समवेत सम्भावनायें छुपी रहती हैं। ममता कालिया ने अपनी रचना-यात्रा का आरंभ कविता से ही किया था। इन वर्षों में वे कथाजगत में होने 56 के बावजूद कविता से अनुपस्थित नहीं रही हैं। प्रस्तुत कविता-संग्रह 'खाँटी घरेलू औरत' उनकी इधर के वर्षों में लिखी गई ताज़ा कविताओं को सामने लाता है। खाँटी घरेलू औरत उनके जेहन में महज़ 1 एक पात्र नहीं वरन् एक विराट प्रतीक है जीवन के उस फ्रेम का जिसमें हर्ष और विषाद, आल्हाद और उन्माद, प्रेम और प्रतिरोध, सुख और असंतोष कभी अलग तो कभी गड्ड-मड्ड दिखाई देते हैं। शादी की अगली सुबह हर स्त्री खाँटी घरेलू की जमात में शामिल हो जाती है। इस सच्चाई में ही दाम्पत्य का सातत्य है। ममता कालिया की कविताओं की अंतर्वस्तु हमेशा उनका समय और समाज रही है। सचेत संवेदना, मौलिक कल्पना, अकूत ऊर्जा और अचूक दृष्टि से तालमेल से ममता का कविजगत निर्मित होता है। इन रचनाओं में जीवनधर्मिता और जीवन में संघर्षधर्मिता का स्वर सर्वोपरि है। इसलिये ये कविताएँ संवाद भी हैं और विवाद भी। इनमें चुनौती और हस्तक्षेप, स्वीकार और नाकार, मौन और सम्बोधन, सब सम्मिलित हैं। विवाह और परिवार के वर्चस्ववादी चौखटे, स्त्री की नवचेतना से टकरा कर दिन पर दिन कच्चे पड़ रहे हैं। स्त्री और पुरुष की पारस्परिकता एक अनिर्णीत शाश्वतता है जिसमें समता और विषमता घुली मिली रहती हैं। खाँटी घरेलू औरत इन सब स्थितियों का जायज़ा लेती है। जब-जब पुरुष उसे प्रताड़ित करेगा, यह स्त्री नेपथ्य से निकल कर केन्द्र में आ जाएगी और बुलंद आवाज़ में बताएगी कि वह बराबर की मनुष्य है, अतः उसका भी है बराबर का भविष्य समाज में स्त्री की स्थिति की प्रतीति अपने मंद और प्रदीप्त रूपों में इन कविताओं में उपस्थित है। यह कोई मिथकीय, अतिमानवीय, अप्रकट दैवी शक्ति नहीं है। कवि ने उसे हाड़ माँस का व्यक्तित्व प्रदान किया है जो अपनी यथार्थ, गतिशील और प्रचेतप्रज्ञा से पुरुष समाज को लगातार आकुल आश्चर्य में छोड़ कर आगे बढ़ जाता है। परिवार के परिवेश में जीते हुए, अपनी बात रखते हुए, स्त्री, यदि झुकेगी तो जीतने के लिये; यदि रुकेगी तो आगे बढ़ने के लिये। ऐसी अदम्य, अपराजेय स्त्री समूची दुनिया की समानधर्मी स्त्रियों से अन्ततः यही कह सकती है कि “खाँटी घरेलू औरतों, एक हो जाओ!"

About the writer

MAMTA KALIA

MAMTA KALIA "ममता कालिया कई शहरों में रहने, पढ़ने और पढ़ाने के बाद अब ममता कालिया दिल्ली (एनसीआर) में रहकर अध्ययन और लेखन करती हैं। वे हिन्दी और इंग्लिश दोनों भाषाओं की रचनाकार हैं। भारतीय समाज की विशेषताओं और विषमताओं पर अपनी पैनी नज़र रखते हुए ममता कालिया की प्रत्येक रचना के केन्द्र में आज का समाज है। विकासशील समाज में बनते-बिगड़ते सम्बन्ध, प्रगति के आर्थिक, सामाजिक दबाव, स्त्राी की प्रगति को देखकर पुरुष मनोविज्ञान की कुण्ठाएँ और कामकाजी स्त्राी के संघर्ष उनके प्रिय विषय हैं। प्रकाशित पुस्तकों की संख्या विपुल होने के कारण यहाँ केवल उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकों का उल्लेख किया जा रहा है। ममता कालिया ने कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, नाटक, यात्रा- साहित्य और निबन्धों से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है । प्रमुख उपन्यास: बेघर, नरक दर नरक, तीन लघु उपन्यास, दौड़, दुक्खम-सुक्खम, सपनों की होम डिलिवरी, कल्चर-वल्चर। प्रमुख कहानी संग्रह: छुटकारा, सीट नम्बर छह, उसका यौवन, एक अदद औरत, जाँच अभी जारी है, निर्मोही, मुखौटा, बोलने वाली औरत, थोड़ा सा प्रगतिशील, ख़ुशक़िस्मत। कविता संग्रह: । A Tribute to Papa and Other Poems (Writers Workshop), Poems 78 (Writers Workshop), खाँटी घरेलू औरत, पचास कविताएँं, कितने प्रश्न करूँ। संस्मरण: कल परसों के बरसों, कितने शहरों में कितनी बार। निबन्ध् संग्रह: भविष्य का स्त्राी विमर्श, स्त्राी विमर्श का यथार्थ। ममता कालिया ने अनेक कहानी संकलनों का सम्पादन किया है तथा 5 वर्ष महात्मा गाँधी हिन्दी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा की इंग्लिश पत्रिका भ्पदकप की सम्पादक रही हैं। उन्हें मिले पुरस्कारों और सम्मानों की सूची में कुछ इस प्रकार हैं: सर्वश्रेष्ठ कहानी सम्मान हिन्दुस्तान टाइम्स, दिल्ली; यशपाल कथा सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, राम मनोहर लोहिया सम्मान (उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा); वनमाली सम्मान, वाग्देवि सम्मान, सीता स्मृति सम्मान, कमलेश्वर स्मृति सम्मान, के. के. बिड़ला न्यास का व्यास सम्मान। सम्प्रति वे एक उपन्यास और संस्मरणमाला पर कार्य कर रही हैं। पता: बी 3ए/303, सुशान्त एक्वापोलिस, ओपोजिट क्रासिंग्स रिपब्लिक, ग़ाज़ियाबाद-201009 ई-मेल: mamtakalia011@gmail.com "

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