Gatha Rambhateri

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8843-447-8

Author:Dr. Kusum Khemani

Pages:208


MRP : Rs. 295/-

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Rs. 295/-

Details

'गाथा रामभतेरी'

Additional Information

'गाथा रामभतेरी' कुसुम खेमानी का तीसरा उपन्यास है। इसके पहले 'लावण्यदेवी' और 'जड़ियाबाई'-दोनों उपन्यास हिन्दी में पर्याप्त चर्चित हो चुके हैं। इन दोनों उपन्यासों में बंगाली और मारवाड़ी समाज की स्त्रियों का जीवन-संघर्ष उभरकर सामने आया है, किन्तु कथा-वस्तु की दृष्टि से 'गाथा रामभतेरी' सर्वथा भिन्न लोक में विचरण करती है। इसमें राजस्थान की घुमन्तू-फिरन्तू जनजाति बनजारों की गाथा है और केन्द्रीय स्त्री-चरित्र है-बनजारन रामभतेरी। इस उपन्यास के बहाने कुसुम खेमानी ने हिन्दी के कथा-जगत को अनेक अनोखे चरित्र प्रदान किये हैं और उनमें सबसे अजूबा है-रामभतेरी। रामभतेरी अपनी अदम्य संघर्ष-क्षमता और जीवटता से बनजारों के जन-जीवन को सँवारने का प्रयत्न करने वाली शख्सियत में बदल जाती है। जिनका कभी कोई घर नहीं था उन्हें एक स्थायी घर और स्थायी जीवन देने का स्वप्न इस उपन्यास का केन्द्रीय स्वप्न है और यह स्वप्न ही उपन्यास को लक्ष्य की दृष्टि से उच्चतम धरातल पर प्रतिष्ठित करता है। भाषा में लेखिका की पकड़ देखते ही बनती है। लोक-जीवन, बोलचाल और बेशक अनेक मीठी गालियों से अलंकृत यह भाषा अपने प्रवाह में पाठक को बहा ले जाती है। पहले दोनों उपन्यासों की तरह यहाँ भी डॉ. खेमानी की शैली बतरस शैली है जिसमें उन्हें पर्याप्त दक्षता हासिल है। प्रसिद्ध फ्रांसीसी लेखिका सिमोन द बुअवार ने लिखा है कि-'मनुष्य कोई पत्थर या पौधा नहीं है, जो अपने होने भर से सन्तुष्ट हो जाये।' कुसुम खेमानी के कथा-चरित्र भी अपने होने भर से सन्तुष्ट नहीं होते, बल्कि अपने जीवन और समाज का कायाकल्प कर जाते हैं। इसमें कोई सन्देह नहीं कि कुसुम खेमानी के इस नवीनतम उपन्यास का भी हिन्दी जगत में पर्याप्त स्वागत होगा। -एकान्त श्रीवास्तव

About the writer

Dr. Kusum Khemani

Dr. Kusum Khemani शिक्षा : एम. ए. (फ़र्स्ट क्लास), पीएच.डी., कलकत्ता विश्वविद्यालय। सृजन : कुसुम खेमानी की प्रतिनिधि कहानियाँ (कहानी-संग्रह) के साथ चयनित कहानियों के चार संग्रह। एक शख़्स कहानी-सा (जीवनी), कहानियाँ सुनाती यात्राएँ (यात्रा-वृत्तान्त), कुछ रेत... कुछ सीपियाँ...विचारों की (ललित निबन्ध), लावण्यदेवी (उपन्यास), जड़ियाबाई (उपन्यास), अमृतकन्याएँ (प्रकाशनाधीन डॉ. कुसुम खेमानी उपन्यास)। अनुवाद एवं सम्पादन : जन-अरण्य (उपन्यास, शंकर), चश्मा बदल जाता है (उपन्यास, आशापूर्णा देवी) एवं ज्योतिर्मयी देवी के कहानी-संग्रह का अनुवाद एवं सम्पादन। शोध एवं सेमिनार : 'लावण्यदेवी' उपन्यास का अंग्रेज़ी, बांग्ला, नेपाली, तमिल, मलयालम, ओड़िया, राजस्थानी एवं मराठी में अनुवाद। 'कहानियाँ सुनाती यात्राएँ', बांग्ला, राजस्थानी एवं मलयालम में प्रकाशित। 'सच कहती कहानियाँ' की कथा-भाषा पर डॉ. सुहासिनी (तमिल), करमजीत कौर (पंजाबी), विनीता सिंह (हिन्दी) एवं अंजना कुकरेती (कन्नड़) द्वारा शोध। विविध : 'रश्मिरथी माँ' कहानी पर उर्मिला देवी मूवी टोन द्वारा बांग्ला में टेलीफ़िल्म का निर्माण। डॉ. खेमानी की कहानियों पर सुप्रतिष्ठित नाट्य संस्था 'लिटिल थेस्पियन' एवं 'मुद्रा आर्ट्स' द्वारा नाट्य मंचन। सम्मान : 'कुसुमांजलि साहित्य सम्मान' (दिल्ली), 'साहित्य भूषण सम्मान' (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान), ‘हरियाणा गौरव सम्मान' (हरियाणा साहित्य अकादमी), 'रत्नीदेवी गोइन्का वाग्देवी पुरस्कार' (मुम्बई), 'भारत निर्माण सम्मान’, ‘पश्चिम बंग प्रान्तीय मारवाड़ी सम्मेलन पुरस्कार', 'कौमी एकता पुरस्कार', 'भारत गौरव सम्मान', (भारतीय वाङ्मयपीठ), 'समाज बन्धु पुरस्कार' (मारवाड़ी युवा मंच), 'अम्बिका प्रसाद दिव्य साहित्यिक पुरस्कार' (भोपाल), 'साहित्य साधिका सम्मान' (सिक्ख नारी मंच), 'दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कार' (भोपाल) एवं 'लल्लेश्वरी शारदा साहित्य सम्मान' (हिन्दी कश्मीरी संगम)।

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