Shami Kagaz (Paper Back)

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-739-3

Author:Nasera Sharma

Pages:174


MRP : Rs. 175/-

Stock:In Stock

Rs. 175/-

Details

शमी कागज़

Additional Information

नासिरा शर्मा की इन कहानियों से गुज़रते हुए आपको महसूस होगा जैसे आप इन्सानी अहसास के घने जंगल से गुजर रहे हैं। जहाँ ज़िन्दगी की हरियाली के साथ राह में बिछे अनुभूतियों के इतने गुंचे चिटखते हैं। कि आपके दिल व दिमाग़ के साथ आपकी रूह भी ख़ुशबू से सराबोर हो उठती है मगर यह नशा ऐसा नहीं है जो ज़माने के सितम और ज़िन्दगी की पेचीदगियों के रूप में उगे काँटों की चुभन का तीखा अहसास न दे सके मगर वे दुख किरदारों को जड़ नहीं बनाते हैं बल्कि वे एक नए जहाँ की खोज कर बैठते हैं। ख़ुशबू का रंग, मिस्र की ममी, शामी काग़ज़, आबे-तौबा और आशियाना जैसी कहानियाँ हैं जो हालात और जज़्बात के कठघरे में खड़ा कर इन्सान को ज़िन्दगी से हमकलाम होने का जहाँ मौका देती हैं वहीं उन्हें दोबारा जीने की प्रेरणा भी देती हैं। पूरे संग्रह में जो सूफियाना माहौल है उसे वहाँ के लोग और प्रकृति बनाती है जो यह सोचने पर मज़बूर करती है कि क्रांति से पहले के ईरान का चेहरा क्या वाक़ई ऐसा था। अहसास की भूमि पर रचा मेरा यह कहानियों का संकलन 'शामी काग़ज़' एक ऐसा दर्पण है जो ईरानी रंगों से सराबोर होने के बावजूद, इन्सानी भावनाओं का प्रतीक है और उसमें हर देश, भाषा, रंग का इन्सान अपना प्रतिबिम्ब देख सकता है। सभ्यता ने उसे चाहे नई पहचान देकर विभिन्न नामों और विभिन्न देशी सीमाओं में बाँध दिया है, मगर इससे इनकार नहीं कि हम सब आदम की औलाद वास्तव में एक-दूसरे के अंग हैं जिनकी सष्टि और उत्पत्ति का स्रोत एक है। दो शब्दों में लिखी यह पंक्तियाँ वास्तव में जी उठती हैं जब हम नासिरा शर्मा की इन कहानियों से गुज़रते हैं।

About the writer

Nasera Sharma

Nasera Sharma जन्म : 1948, इलाहाबाद में। शिक्षा : फारसी भाषा और साहित्य में एम.ए.। रचना-संसार : ‘ठीकरे की मँगनी’, ‘पारिजात’, ‘शाल्मली’, ‘ज़िंदा मुहावरे’, ‘कुइयाँजान’, ‘ज़ीरो रोड’, ‘सात नदियाँ एक समुंदर’, ‘अजनबी जजीरा’, ‘अक्षयवट’ और ‘का़गज़ की नाव’ (उपन्यास); ‘कहानी समग्र’ (तीन खंड), ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘शामी का़गज़’, ‘पत्थर गली’, ‘संगसार’, ‘इब्ने मरियम’, ‘सबीना के चालीस चोर’, ‘ख़ुदा की वापसी’, ‘बुत़खाना’, ‘दूसरा ताजमहल’, ‘इनसानी नस्ल’ (कहानी-संग्रह); ‘अ़फ़गानिस्तान : बुजकशी का मैदान’ (संपूर्ण अध्ययन दो खंड), ‘मरजीना का देश इराक’, ‘राष्ट्र और मुसलमान’, ‘औरत के लिए औरत’, ‘वो एक कुमारबाज़ थी’ (लेख-संग्रह); ‘औरत की आवाज़’ (साक्षात्कार); ‘जहाँ फौवारे लहू रोते हैं’ (रिपोर्ताज); ‘यादों के गलियारे’ (संस्मरण); ‘शाहनामा फ़िरदौसी’, ‘गुलिस्तान-ए-सादी’, ‘किस्सा जाम का’, ‘काली छोटी मछली’, ‘पोयम ऑफ परोटेस्ट’, ‘बर्निंग पायर’, ‘अदब में बाईं पसली’ (अनुवाद); ‘किताब के बहाने’ और ‘सबसे पुराना दरख़्त’ (आलोचना); बाल-साहित्य में ‘दिल्लू दीनक’ और ‘भूतों का मैकडोनाल्ड’ (उपन्यास); ‘संसार अपने-अपने’, ‘दादाजी की लाठी’ (कहानी); ‘प्लेट़फार्म नं. ग्यारह’, ‘दहलीज़’ तथा ‘मुझे अपना लो’ (रेडियो सीरियल); ‘नौ नगों का हार’ (टी.वी. सीरियल)।

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