DHOKHA (HARD BOUND)

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-760-0

Author:SURAJPAL CHAUHAN

Pages:84


MRP : Rs. 150/-

Stock:In Stock

Rs. 150/-

Details

लोग विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों को मानते हैं । सभी धर्मों की अपनी-अपनी मान्यताएँ हैं, कोई मूर्ति पूजा करता है, तो कोई नहीं । कोई गंजा रहता है, तो कोई चुटिया रखता है, कोई केश दाढ़ी कटवाना पाप समझता है । कुछ अपनी इच्छा के अनुसार दाढ़ी, केश रखते हैं । कोई ईश्वर को आकार देता है, कोई निराकार के रूप में मानता है । कोई तलवार रखता है, कोई त्रिशूल । कुछ ईश्वर के पुत्र के रूप में आते हैं । कोई अपने धार्मिक स्थल पर जूता निकाल कर अन्दर जाता है, कोई जूता पहने जाता है । कोई हवन करता है, कोई मिलाद करता है । कोई मांसाहार और कोई शाकाहार की बात करता है, तो कोई सर्वाहार की बात करता है । किसी को जलाया जाता है तो किसी को बॉक्स में बन्द करके और किसी को बिना बॉक्स ही दफन किया जाता है और सभी धर्मों की एक शिक्षा है कि इंसान को इंसान समझें । एक प्रश्न उठता है कि जितने भी भगवान, ईश्वर के पुत्र और पैगम्बर, संत लोग आये । उन्होंने शांति अमन, इंसानियत का पैगाम दिया । पूजा करने की विधि धर्म के अनुसार अवगत कराया । लेकिन मरने पर उत्तर की तरफ सिर करने में काफी हद तक एक रूपता पाई जाती है। आखिर क्यों ? विभिन्न धर्मों के मानने वाले, जब अपने धर्म को नहीं मानते जो उन्हें इंसानियत का पैगाम देती है, लेकिन जो धर्म में नहीं है उसे मानते हैं। क्या धर्म कहता है कि इंसान को इंसान ना समझना, छुआ-छूत, भेदभाव करना, जाति आधारित व्यवस्था पर कायम करना ? वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विषमतावादी भारतीय समाज में जातिभेद, ऊँच-नीच की भावनाएँ शोषित, पीड़ित, अपमानित, अभावग्रस्त और दलित जीवन की व्यथा मौजूद है । प्रस्तुत है सूरजपाल चौहान की पुस्तक 'धोखा' जो समाज पर लघु कहानियों के माध्यम से कटाक्ष करती है ।

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About the writer

SURAJPAL CHAUHAN

SURAJPAL CHAUHAN सूरजपाल चौहान जन्म: 20 अप्रैल, 1955, फुसावली, जनपद अलीगढ़ (उत्तर-प्रदेश) हिन्दी साहित्य परिषद, अहमदाबाद द्वारा सम्मानित कथाकार। 'रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार' वर्ष-2002 के लिए सम्मानित। अम्बेडकर मिशन सोसायटी (रजि.) पंजाब द्वारा सम्मानित। साहित्य अकादमी द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन' नई दिल्ली में मुंशी प्रेमचंद की 125वीं जयंती पर 'मुंशी प्रेमचंद एव दलित विमर्श' विषय पर भागीदारी। अंग्रेजी, जर्मन, तेलगू, मराठी, गुजराती, पंजाबी एवं उर्दू में रचनाएँ अनूदित एवं प्रकाशित। कहानी-संग्रह हैरी कब आएगा' आत्मकथा 'तिरस्कृत' कविता-संग्रह 'प्रयास' और 'क्यों विश्वास करूँ बाल कविताएँ : 'बच्चे सच्चे किस्से' और 'मधुर बालगीत' संपादन : 'हिन्दी के दलित कथाकारों की प्रकाशित पहली कहानी' आत्मकथा 'संतप्त' सम्प्रति : भारत सरकार के उपक्रम (एस.टी.सी. ऑफ़ इण्डिया लि., नई दिल्ली) में प्रबन्धक (प्रशासन) के पद पर कार्यरत। सम्पर्क : डी-20, एस.टी.सी. कालोनी, महरौली रोड, नई दिल्ली-110017

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