Chhabbis Kahaniyan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-88434-42-3

Author:DR. NARESH

Pages:158


MRP : Rs. 495/-

Stock:In Stock

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Details

कहानी में कल्पना की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन कहानी जितनी स्वानुभूत होगी, उतनी ही पाठक को लीलने में समर्थ होगी। इसके लिए लेखक को अपने निजी दुःखों के साथ-साथ अनेकानेक ओढ़े हुए दुःखों को भी भोगना पड़ता है। दुःख जिसके अन्दर जितना बुला हुआ होगा, उसकी रचना में उतनी अधिक शक्ति करवटें ले रही होगी। दुःख-वीथी की यात्रा सृजनात्मक ऊर्जा की जन्मदात्री होती है। कविता कहीं ऊपर से, ग़लिब के शब्दों में ‘गैब से उतरती है लेकिन कहानी सीता की तरह धरती के सीने में से जन्म लेती है। कहानी लिखना हाथ से फिसल रहे क्षणों को पकड़कर निचोड़ना है। क्षण को पकड़ लेना भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है, लेकिन हो सकता है हर बार उसे निचोड़ पाना सम्भव न हो। ये फिसलते हुए पल कहानीकार के अपने निजी पल भी हो सकते हैं, दूसरों के जीवन से चुराकर भोगे हुए पल भी हो सकते हैं। एक पल का एहसास अपनी सम्पूर्ण शक्ति के साथ फैलता है तो कहानी बन जाता है।

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About the writer

DR. NARESH

DR. NARESH 7 नवम्बर, 1942, मालेरकोटला (पंजाब) में जन्मे कवि-कथाकार-आलोचक डॉ. नरेश लम्बे समय तक पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक साहित्य के आचार्य एवं चंडीगढ़ साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष रहे हैं। आलोचना तथा रचनात्मक साहित्य की अनेक पुस्तकों की रचना के साथ-साथ उन्होंने हिन्दी-कविता की कई विस्मृत-विलुप्त पाण्डुलिपियाँ खोजकर उनको सम्पादित एवं प्रकाशित किया है। डॉ. नरेश को देश के विभिन्न राज्यों यथा पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब आदि से राज्य-पुरस्कार, भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार, म्यूज़िक वर्ल्ड, इंगलैण्ड का ‘पोएट ऑफष् दि मिलेनियम एवार्ड’ तथा अन्य कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उनकी अनेक कविताओं-कहानियों का देश-विदेश की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

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