Coolie Lines

Format:Paper Back

ISBN:978-93-88684-04-0

Author:Praveen Kumar Jha

Pages:280


MRP : Rs. 299/-

Stock:In Stock

Rs. 299/-

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कुली लाइन्स

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हिन्द महासागर के रियूनियन द्वीप की ओर 1826 ई. में मज़दूरों से भरा जहाज़ बढ़ रहा था। यह शुरुआत थी भारत की। जड़ों से लाखों भारतीयों को अलग करने की। क्या एक विशाल साम्राज्य के लालच और हिन्दुस्तानी बिदेसियों के संघर्ष की यह गाथा भुला दी जायेगी? एक सामन्तवादी भारत से अनजान द्वीपों पर गये ये अँगूठा-छाप लोग आख़िर किस तरह जी पायेंगे? उनकी पीढ़ियों से। हिन्दुस्तानियत ख़त्म तो नहीं हो जायेगी? लेखक पुराने आर्काइवों, भिन्न भाषाओं में लिखे रिपोर्ताज़ों और गिरमिट वंशजों से यह तफ़्तीश करने निकलते हैं। उन्हें षड्यन्त्र और यातनाओं के मध्य खड़ा होता एक ऐसा भारत नज़र आने लगता है, जिसमें मुख्य भूमि की वर्तमान समस्याओं के कई सूत्र हैं। मॉरीशस से कनाडा तक की फ़ाइलों में ऐसे कई राज़ दबे हैं, जो ब्रिटिश सरकार पर ग़ैर-अदालती सवाल उठाते हैं। और इस ज़िम्मेदारी का अहसास भी कि दक्षिण अमरीका के एक गाँव में भी वही भोजन पकता है, जो बस्ती के एक गाँव में। ‘ग्रेट इंडियन डायस्पोरा' आख़िर एक परिवार है, यह स्मरण रहे। इस किताब की यही कोशिश है।

About the writer

Praveen Kumar Jha

Praveen Kumar Jha प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। उनके बहुमुखी लेख भारतीय अखवारों- पत्रिकाओं-हिन्दुस्तान प्रभात ख़बर, द कैपिटल पोस्ट, प्रजातन्त्र, 'सदानीरा और मुख्य मीडिया पोर्टलों पर प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने एक सामाजिक व्यंग्य-संग्रह ‘चमनलाल की डायरी', और दो यात्रा संस्मरण-आइसलैण्ड और नीदरलैण्ड पर भी लिखे। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ, और वह भारत के भिन्न-भिन्न शहरों से गुज़रते अमरीका और यूरोप महादेश में रहे। वह निवर्तमान नॉर्वे (यूरोप) में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।

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