Sorry Mummy

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5000-366-4

Author:ISMAT CHUGHATAI

Pages:72


MRP : Rs. 75/-

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Rs. 75/-

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इस्मत की कहानियों का तर्जुमा आसान नहीं। सबसे भारी मुसीबत है- भाषा, क्योंकि इस्मत की कहानियों में विषय के साथ सबसे चौंकाने वाली चीज़ होती है- 'भाषा'। आप इस अज़ीबों ग़रीब भाषा का क्या करेंगे। ग़ालिब के अशआर का तर्जुमा यदि मुमकिन है तो इस्मत की कहानियों का भी तर्जमा हो सकता है। मगर आप जानिये, ग़ालिब तो ग़ालिब थे, ग़ालिब का असल मज़ा तो भाषा में है। बस यही इस्मत को भी 'छका' देती है। निगोड़ी, ऐसी अज़ीबों ग़रीब ज़बान का इस्तेमाल करती हैं कि बड़े-बड़ों और अच्छे-अच्छों के पसीने निकल आयें। इस भाषा के लिए अलग से 'अर्थ' की दुकान नहीं खोली जा सकती, इसलिए ज़्यादा जगहों पर इस्मत की ख़ूबसूरत ज़बान से ज़्यादा छेड़-छाड़ की कोशिश नहीं। की गयी है। हाँ, कहीं-कहीं हिन्दी तर्जुमा। ज़रूरी मालूम हआ है, तो लफ़्ज़ बदले गये हैं।

About the writer

ISMAT CHUGHATAI

ISMAT CHUGHATAI इस्मत चुग़ताई (1912-1992) उर्दू कथा साहित्य में अपनी बेबाक अभिव्यक्ति के लिए अलग से जानी जाती हैं। उनकी कृतियों में मानवीय करुणा और सक्रिय प्रतिरोध का दुर्लभ सामंजस्य है जिसकी बिना पर उनकी सर्जनात्मक प्रतिमा की एक विशिष्ट पहचान बनती है। इस्मत चुग़ताई शुरुआत से ही प्रगतिशील साहित्यांदोलन से जुडी रहीं और जब ज़रूरत हुई, उन्होंने कन्धे से कन्धा मिलाकर काम किया लेकिन कभी ख़ुद को तरक़्क़ी पसन्द कहलाने का आग्रह नहीं किया। आन्दोलन के पहले उभार के दौरान प्रगतिशील लेखकों के उर्दू मुख-पत्र ‘नया अदब’ में प्रकाशित उनकी कहानियों के जरिए प्रगतिशील कथालेखन का एक नया रुजहान सामने आया। उन्होंने प्रगतिशील कथा-आलोचना के प्रतिमानों के सामने चुनौती खड़ी कर दी।

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