Muhabbat Ek Daastaan Hai : Sansar Ki Charchit Prem Kahaniyan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-89012-53-8

Author:Dr. Fanish Singh

Pages:276


MRP : Rs. 495/-

Stock:In Stock

Rs. 495/-

Details

प्रस्तुत पुस्तक में हिन्दी के बारह कहानीकार हैं, एक कहानी बंगला से अनूदित है और आठ कहानियाँ पाश्चात्य भाषाओं से ली गयी हैं। जर्मन, फ्रेंच, रूसी, अंग्रेज़ी और स्पेनिश भाषा में लिखी कहानियों के अनुवाद प्रेम और मानव के विभिन्न पक्षों को दिखलाते हैं। तड़प, वेदना, वियोग, समर्पण, लव एट फर्स्ट साइट सभी प्रभावित करते हैं। इस प्रकार शरतचन्द्र की कहानी 'अनुपमा का प्रेम' एक ओर तो रोमांटिक विचारधारा पर व्यंग्य है तो दूसरी ओर हृदय की भाषा की श्रेष्ठता को भी इंगित करती है जहाँ प्रेम वास करता है। अनुवाद सुन्दर और सहज है और उनकी भाषा आधुनिक हिन्दी ही है। हिन्दी की कहानियों में बिम्बों, प्रतीकों, वर्गगत पात्रों की चिन्तन प्रक्रिया, प्रेम की मानवीयता, व्यक्तिगत वेदना से उत्पन्न दूसरों के कष्टों के निवारण की चेष्टा का वर्णन है। फणीश सिंह ने एक विशिष्ट सम्पादकीय कुशलता दिखलाई है। उनकी दृष्टि विलक्षण है और लोक कल्याण से परिपूर्ण है जो कहानियों के संकलन से स्पष्ट है। डॉ. प्रो. शैलेश्वर सती प्रसाद

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About the writer

Dr. Fanish Singh

Dr. Fanish Singh डॉ. फणीश सिंह जन्म 15 अगस्त, 1941 को ग्राम नरेन्द्रपुर, जिला सिवान (बिहार) में एक जश्मींदार परिवार में। 15 वर्ष की आयु में हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से ‘विशारद’ की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात् एम.ए. तथा बी.एल. करने के बाद पटना उच्च न्यायालय में अगस्त 1967 में वकालत आरम्भ की। छात्रा जीवन से ही हिन्दी साहित्य से अनुराग था और अनेक लेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। भारतीय प्रतिनिधि के रूप में 1983 में मॉस्को और 1986 में कोपनहेगेन विश्व-शान्ति सम्मेलन में शामिल हुए। भारत सोवियत संघ की पाँच बार यात्रा की। विश्व-शान्ति परिषद् के विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मिलित होने के लिए डेनमार्क, स्वीडन, इस्टोनिया, पोलैंड, जर्मनी, चेकोस्लोवाकिया, फ्रांस, इटली, ऑस्ट्रिया, इंग्लैंड, अमरीका और पुनः जर्मनी की यात्रा की। सन् 2006 में अखिल भारतीय शान्ति एवं एकजुटता संगठन के प्रतिनिधि-मण्डल के सदस्य के रूप में चीन की यात्रा की। आपने हाल ही में टर्की, पुर्तगाल, ग्रीस, स्पेन, हंगरी, हॉलैंड, बेल्जियम, स्काटलैंड एवं पुनः इंग्लैंड की यात्रा की। दक्षिण-पूर्व एशिया पर भारतीय संस्कृति के प्रभाव के अध्ययन के सिलसिले में म्यांमार, थाइलैंड, लाओस, वियतनाम, कम्बोडिया, इंडोनिसिया (बाली), मलेशिया, सिंगापुर, मालदीव, श्रीलंका, फिलीपिंस एवं बोर्नियो की यात्रा कर चुके हैं। अपनी दसवीं यूरोपीय यात्रा के क्रम में हाल में ही फिनलैंड, हंगरी, बुल्गारिया, मैसिडोनिया एवं सर्बिया की यात्रा की। भारतीय सांस्कृतिक सम्बद्ध परिषद (प्ण्ब्ण्ब्ण्त्ण्) के सलाहकार सदस्य। 1984 में ही पूर्वी जर्मनी के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च सम्मान द्वारा सम्मानित। आपने हिन्दी साहित्य के इतिहास और विभिन्न विदेशी भाषाओं की कहानियों का विशेष अध्ययन किया। गोर्की और प्रेमचन्द के कृतित्व और जीवन-दृष्टिकोणों की सादृश्यता से दोनों पर शोध कार्य की प्रेरणा ली और इस विषय में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। पहली पुस्तक ‘प्रेमचन्द एवं गोर्की का कथा-साहित्य: एक अध्ययन’ दिसम्बर 2000 में प्रकाशित हुई। अब तक इनकी 12 पुस्तकें हिन्दी साहित्य के विभिन्न विषयों एवं स्वाधीनता आन्दोलन पर प्रकाशित हो चुकी हैं।

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