Yatharth Ki Dharti Aur Sapna

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8679-991-3

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Pages:150


MRP : Rs. 250/-

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यथार्थ की धरती और सपना

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"स्थानीय सवालों की जड़ें तथा जुड़ाव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय निर्णयों और नीतियों में खोजना जरूरी हो गया है"-यह गहरी समझ रवि जी की कई हल्की-फुल्की टिप्पणियों में भी है। अणयुद्ध ही नहीं, अणऊर्जा से भी बढ़ता जा रहा खतरा रवि जी ने सरल शब्दों में प्रकट किया है। वे समृची जनता को सोचने और बदलने के लिए प्रेरित करने की ख्वाहिश रखते हैं। ठोस वैज्ञानिक जानकारी देकर यह लेखक आम लोगों के सामने एक भयंकर चित्र खड़ा करता है। बिहार के वंचित समाज से आकर, जयप्रकाश जी के साथ निकल पड़े सामाजिक कार्य में खुद की जिन्दगी लगा रहे युवा साथियों में से हैं राजेंद्र रवि उन्हें केवल एक आरामदायी पर्यावरणवादी नहीं बनना है, न ही उन्हें अराजनीतिक दायित्व का कार्य करना है। राजनीति की अधिक व्यापक परिभाषा मानते हैं वे इस परिभाषा में उन जनतांत्रिक जन-आंदोलनों का प्रमुख स्थान है जिनमें राजनीतिक ताकत इन्हीं गरीबों-श्रमिकों-महिलाओं से आती है। रवि जी इन आंदोलनों के समन्वय तथा संघर्ष में भी अपनी जवाबदेही उतनी ही। मानते हैं जितनी हम अपेक्षा करते हैं राजनीतिक दलों से इसी सोच और निष्ठा के कारण संगठन पद्धति तथा साधनों पर उनकी कछ दुःखभरी, किंत मार्गदर्शक टिप्पणियाँ भी इस संग्रह में शामिल हैं। जन-आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की प्रक्रिया में समन्वयक के रूप में योगदान देने वाले राजेंद्र रवि का यह विशेष संवेदनशील और विचारशील योगदान हम मानते हैं। यह संग्रह कई समस्याओं तथा समस्याग्रस्तों के आपस के वैचारिक और भावनात्मक जुड़ाव को। सशक्त बनाने की हमारी कोशिश की ही एक कड़ी साबित होगा।"

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