Aadhnik Vigyanpan

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8715-515-2

Author:DR. PREMCHAND PATANJALI

Pages:176


MRP : Rs. 75/-

Stock:In Stock

Rs. 75/-

Details

आधुनिक विज्ञापन

Additional Information

जिस तीव्रता से विश्व औद्योगीकरण की ओर बढ़ रहा है उतनी ही तीव्रता से विज्ञापन का महत्व बढ़ता जा रहा है। समयानुसार इसकी संरचना एवं शिल्प में आवश्यकतानुकूल परिर्वतन होता रहा है। वस्तुतः आधुनिक समाज में विज्ञापन की भूमिका बहुत हद तक बदल गई है। आज विज्ञापन केवल सूचना मात्र नहीं देता बल्कि उपभोक्ता को ब्रांड-विशेष खरीदने के लिए बाध्य भी करता है। आधुनिक पूंजीवादी समाज में विज्ञापन का दायित्व पहले की अपेक्षा बढ़ गया है। इसकी भूमिका में भी गुणात्मक परिवर्तन आ गया है। वस्तुतः किसी भी समाज व्यवस्था के विकास का मापदंड उसकी अर्थव्यवस्था होती है और अर्थव्यवस्था के विकास का मूल है विज्ञापन। डॉ. पातंजलि की यह पुस्तक आधुनिक युग में विज्ञापन के बदलते स्वरूप को उद्घाटित करती है। आधुनिक विज्ञापन का कलेवर, विषय-वस्तु, संरचना एवं भाषा संबंधी सभी परिवर्तनों पर लेखक की दृष्टि बराबर बनी रही है। व्यावहारिक हिन्दी को बढ़ावा देने और उसके प्रयोग-क्षेत्र को विस्तृत करने के लिए निरन्तर प्रयासरत डॉ. पातंजलि की इस पुस्तक में आधुनिक विज्ञापन के सभी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। विज्ञापन जैसे विषय पर हिन्दी भाषा में पुस्तक लिखने के गंभीर प्रयास अभी तक नहीं हुए हैं। प्रस्तुत पुस्तक इसी रिक्तता को भरने का सार्थक प्रयास है। टॉपचंद पातंजलि

About the writer

DR. PREMCHAND PATANJALI

DR. PREMCHAND PATANJALI डॉ. प्रेमचंद पातंजलि का जन्म दिल्ली के गांव हरेवली में 20 जुलाई, 1943 को हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से हिन्दी में बी.ए (ऑनर्स-1963) व एम.ए. (1965) भाषा विज्ञान विभाग में डिप्लोमा (1967), दिल्ली विश्वविद्यालय कें हिन्दी विभाग से ‘हरियाणा की कृषि सम्बन्धी शब्दावली’ विषय पर पी-एच.डी. (1973) की उपाधि प्राप्त की। दिल्ली के स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज मे अध्यापन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के गांधी भवन में उपनिदेशक के पद पर गांधी जी के दर्शन व विचारों का प्रचार-प्रसार किया। 1991 में भीमराव अम्बेडकर कॉलेज की स्थापना के बाद प्राचार्य के पद पर कार्य कर रहे हैं। लोक साहित्य, भाषा विज्ञान व हिन्दी पत्रकारिता के अतिरिक्त रोजगारपरक हिन्दी में विशेष रूचि। हिन्दी पत्रकारिता शिक्षण में विशेष दक्षता के आधार पर वर्ष 1996 के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय ने हिन्दी पत्रकारिता विभाग में बिजिटिंग प्रोफेसर के रूप में आमन्त्रित किया। देश में पहली बार स्नातक स्तर पर हिन्दी पत्रकारिता के बी.ए (ऑनर्स) पाठ्यक्रम को आरम्भ करने का श्रेय आपको प्राप्त है।

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