Bhasha Shikshan

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-840-6

Author:RAVINDRANATH SRIVASTAVA

Pages:232


MRP : Rs. 175/-

Stock:In Stock

Rs. 175/-

Details

भाषा शिक्षण

Additional Information

भाषा शिक्षण की समसामयिक विधियों के पीछे इन दो दशकों में होने वाले भाषा चिन्तन सम्बन्धी परिवर्तन का हाथ देखा जा सकता है। भाषा सिद्धान्त के अभिविन्यास में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के स्थान पर हम संज्ञानात्मक भाषाविज्ञान का प्रचलन पाते हैं, अधिगम सिद्धान्त के क्षेत्र में स्किनर और आसगुड के 'साहचर्यवादी' दृष्टिकोण के स्थान पर एक ओर चॉम्स्की, काट्स, लेनेबर्ग आदि का 'सत्ववादी' दृष्टिकोण पाते हैं और दूसरी तरफ वीवर, फ्रोडर, पिआजे, ब्राउन आदि विद्वानों द्वारा प्रतिपादित 'प्रतिक्रियावादी' दृष्टिकोण को विकसित होते देख रहे हैं। इसी तरह हम पाते हैं भाषा शिक्षण के 'केन्द्रक' में नया परिवर्तन।

About the writer

RAVINDRANATH SRIVASTAVA

RAVINDRANATH SRIVASTAVA रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव दिल्ली विश्वविद्यालय के भाषाविज्ञान विभाग में सम्प्रति वरिष्ठतम प्रोफ़ेसर रहे हैं। लेनिनग्राद विश्वविद्यालय (सोवियत संघ) से भाषाविज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि के बाद पोस्ट-डॉक्टरेट शोध के लिए अमेरिका गये। वे यूनेस्को और यूनाइटेड नेशन्स की भाषा समितियों में विशेषज्ञ के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिका और इटली के विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर के रूप में अध्यापन किया है। उनकी पाँच पुस्तकें और अंग्रेजी, रूसी और हिन्दी में कई लेख प्रकाशित हो चुके हैं। विशेषज्ञता : अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, समाजभाषा विज्ञान, संकेतविज्ञान, शैली विज्ञान और प्रजनन स्वन विज्ञान।

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