EK DURJEY MEDHA VISHNU KHARE

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ISBN:81-8143-136-7

Author:PRAKASH MANU

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MRP:Rs.425/-

Stock:In Stock

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विष्णु खरे समकालीन कविता के सबसे जटिल, विलक्षण और शक्तिशाली कवि हैं जिन्होंने कविताएँ सिर्फ लिखी ही नहीं, बल्कि अपने बाद में आने वाले कवियों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है। ऊपर से कई बार खी, गद्यात्मक और सपाट लगती विष्णु खरे की कविताएँ सिर्फ लिखी ही नहीं, बल्कि अपने बाद मेें आने वाले कवियों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है। ऊपर से कई बार रूखीद्व गद्यात्मक और सपाट लगतीं विष्णु खरे की कविताएँ अपने भीतर समय और समाज का इतना गहरा द्वन्द्व, सामाजिक-राजनीतिक हलचलें और मर्मांतक यातनाओं की कथाएँ लिए हुए हैं कि एक तरह से विष्णु खरे की कविताएँ समकालीन हिन्दुस्तानी समाज का आईना ही नहीं, ‘इतिहास’ भी हैं। मुक्तिबोध की तरह विष्णु खरे भी ऐसे दुर्बोध लेकिन जरूरी कवि हैं जिनकी किसी से तुलना नहीं हो सकती-और अगर करनी ही हो, तो अकेले मुक्तिबोध ही हैं जिनसे किसी हद तक उनकी तुलना सम्भव है। मुक्तिबोध की तरह ही विष्णु खरे सिर्फ सच का ईमानदार से पीछो करती कविताओं के कारण ही नहीं, बल्कि अपने विचारों, आलोचनात्मक लेखों तथा साहित्य, समाज और राजनीति पर अपनी एकदम मौलिक किस्म की टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते हैं। यहाँ उनसे प्रेरणा या कहें ‘रोशनी’ पाने वाले कवियों, लेखकों, पाठकों की एक लम्बी कतार है। बरसों से विष्णु खरे के निकट रहे प्रकाश मनु की पुस्तक ‘एक दुर्जेय मेधा विष्णु खरे’ इस विलक्षण कवि को नजदीक से देखने-जानने के लिए ‘एक अति संवेदी आईने’ सरीखी है, जिसे पढ़ लेने का मतलब विष्णु जी के भीतर-बाहर की तमाम हलचलों का गवाह होने के साथ-साथ, अपने जाने हुए कवि को फिर से एक नये रूप में जानना है। इसलिए कि यह पुस्तक जाने हुए विष्णु खरे के साथ-साथ, अभी तक न जाने गये विष्णु खरे की खोज की बेचैनी से ही उपजी है। विष्णु खरे की कविताओं और अनूदित किताबों पर अनौपचारिक टीपों के साथ-साथ न पर लिखा गया प्रकाश मनु का लम्बा संस्मरण और समय-समय पर लिए गये चार खुले, विचारोत्तेजक इन्टरव्यू विष्णु खरे के भीतर चल रहे और निरन्तर तीव्र होते ‘महाभारत’ को भी गहरी अन्तरंगता के साथ हमारी आँख के आगे ले आते हैं। विष्णु खरे का लम्बा बहुचर्चित आत्कथ्य ‘मैं और मेरा समय’ भी इस पुस्तक में है जो विष्णु जी की आत्मकथा के पन्नों को कविता की-सी हार्दिकता में खोलता है। लिहाजा यह एक जरूरी दस्तावेज बन चुका है। उम्मीद है, विष्णु खरे को समग्रता से देखने-जानने के उत्सुक लेखकों-पाठकों को इस पुस्तक से सुख मिलेगा।

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About the writer

PRAKASH MANU

PRAKASH MANU प्रकाश मनु का जन्म 12 मई, 1950 को शिकोहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रकाश मनु बाल-साहित्य के सुपरिचित हस्ताक्षर माने जाते हैं। आपने बच्चों के लिए ढेरों पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें ‘एक था ठुनठुनिया', ‘गोलू भागा घर से' (बाल उपन्यास), ‘भुलक्कड़ पापा', 'मैं जीत गया पापा', 'तेनालीराम के चतुराई के किस्से', ‘लो चला पेड़ आकाश में', ‘इक्यावन बाल कहानियां', ‘चिन-चिन चूँ' बाल कहानियां), ‘हाथी का जूता', ‘इक्यावन बाल कविताएँ', ‘बच्चों की एक सौ एक कविताएँ' (बाल कविताएँ) पुस्तकें उल्लेखनीय हैं। आपने ‘हिन्दी बाल कविता का इतिहास' लिखा है और आजकल 'बाल साहित्य का इतिहास' लिखने में व्यस्त हैं। बच्चों के अतिरिक्त सामान्य पाठक-वर्ग के लिए लिखे गए आपके उपन्यास ‘यह जो दिल्ली है', ‘कथा सर्कस' तथा ‘पापा के जाने के बाद' भी प्रसिद्ध हैं। आपको कविता-संग्रह ‘छूटता हुआ घर' पर प्रथम गिरिजाकुमार माथुर स्मृति पुरस्कार प्राप्त हुआ। हिन्दी अकादमी के ‘साहित्यकार' सम्मान से भी सम्मानित हुए। प्रकाश मनु बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका ‘नन्दन' के साथ लगभग 25 वर्षों तक जुड़े रहे।

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