Waiting Mother Aur Prem Kahaniyan

Format:Paper Back

ISBN:978-93-88684-52-1

Author:Prof. Manjula Rana

Pages:96


MRP : Rs. 295/-

Stock:In Stock

Rs. 295/-

Details

वेटिंग मदर और प्रेम कहानियाँ

Additional Information

मेरी संवेदनाओं में समकालीन जीवन की सम्पूर्ण व्यथा-कथा के साथ इन सबको स्वीकार कर ऊपर उठने का आग्रह है फिर चाहे यह चिन्ता किसी स्त्री की हो या पुरुष की। इन कहानियों में सृजनात्मकता का भाव है किसी उत्पादन का नहीं इसीलिए समय की तपिश और अनुभव की मार्मिकता के साथ शब्दों को बरतने का सलीका भी देखने को मिलता है। बिना किसी पूर्वाग्रह के ये मन की भट्ठी के ताप से सराबोर हैं। मानवीय करुणा और सक्रिय प्रतिरोध के साथ इनमें स्त्री बनाम पुरुष की बेमानी बहस की कोई जगह नहीं है वरन् स्त्री-मन के उस नायाब कोने पर दस्तक अवश्य दी गयी है, जहाँ बिना किसी हस्तक्षेप के वह अपनी सलोनी लुनाई के साथ पेश आती है। यह प्रचलित धारणाओं से बाहर की सच्चाई है। प्रेम का यह अधिकार समस्त सामाजिक वर्जनाओं के बावजूद पूरी शिद्दत के साथ स्त्री को देना एक हीरक गवाक्ष खोलने के सदृश्य है और यह साहस इन कहानियों का मुख्य स्वर है। पहाड़ की पीड़ा को पीठ पर लादे किन्तु शर्त मुस्कुराने की हो या सामाजिक कुरीतियों का बोझा ढोती परिस्थितियाँ हों अथवा अनमेल विवाह के साथ संस्कारों के आवरण में लिपटी नारी का उजला चित्र हो, अपने समय की विभीषिकाओं से बराबर रू-ब-रू होती और उनसे जूझते हुए जीवन का उजास पूरी बेबाकी के साथ प्रस्तुत किया गया है। मानव मन की विजय यात्रा का जयघोष करती ये कहानियाँ दुनिया से जद्दोजहद करके आत्मीयता के अहसास की शैलीगत अभिव्यंजना हैं।

About the writer

Prof. Manjula Rana

Prof. Manjula Rana प्रो. मंजुला राणा का जन्म सन् 1964 में एक सम्भ्रान्त परिवार में हुआ, जहाँ सामाजिक सरोकारों से इनका जन्म से रिश्ता बँधता चला गया। प्रारम्भ से ही प्रखर बुद्धि की धनी प्रो. राणा का शैक्षिक जीवन वरीयता क्रम से शीर्ष पर रहा, जहाँ एम.ए. (हिन्दी) में स्वर्ण पदक प्राप्त करके ये तत्काल गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर (उत्तराखण्ड) में प्रवक्ता के पद पर चयनित हुईं तथा अध्ययनअध्यापन से अपने कर्म-क्षेत्र की शुरुआत करते हुए वर्तमान में हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के 'हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग' में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। प्रो. राणा वर्ष 2010-2016 तक उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग में सदस्य के पद को भी सुशोभित कर चुकी हैं तथा वर्तमान में राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, नयी दिल्ली की सदस्य हैं। हिन्दी साहित्य जगत में इनके द्वारा लिखित अनेक पुस्तकें अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैंप्रकाशित पुस्तकें : दिनकर के काव्य में रस-योजना, आँसू का भाषिक सौन्दर्य, व्यावहारिक एवं प्रयोजनमूलक हिन्दी, उत्तरांचल का हिन्दी साहित्य, उजास कहाँ है (कहानी संग्रह), दसवें दशक के हिन्दी उपन्यासों में साम्प्रदायिक सौहार्द, मंजुला राणा की पाँच प्रतिनिधि कहानियाँ, कवि लक्ष्य और रचनात्मक प्रवृत्तियाँ : महाकवि सूरदास। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित होकर आप राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय फलकों पर अपनी पुरजोर शैक्षिक दस्तक देती रहती हैं।

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality