Koi Baat Nahin

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8956-374-0

Author:SURYANATH SINGH

Pages:208


MRP : Rs. 295/-

Stock:In Stock

Rs. 295/-

Details

कोई बात नहीं

Additional Information

पिछले फ्लैप का शेष युवाओं के मन की अँधेरी गलियों में खुलती हैं जिनमें धुन्ध है, कोहरा है, अवचेतन आग्रहों के दबाव हैं और सामाजिक सम्बन्धों के अन्तर्भाव हैं। इन्हें खोलना जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डालना है। लेकिन सजग और सचेत कहानीकार ने युवा मानस के धुंधले जीवन-सत्य को उनके मानसिक ऊहापोह के भीतर से धीरे-धीरे उभारते हुए जिस सहजता से उद्घाटित किया है वह ध्यान खींचने वाला है। इससे यह भी पता चलता है कि बाहरी दुनिया जिस तेज़ गति से आगे बढ़ रही है उसमें मन की अन्दरूनी सतहों पर कितना कुछ घिसटता हुआ चल रहा है। इस संग्रह की पहली ही कहानी 'कोई बात नहीं' एक ज़रूरी विषय को इस तरह सामने लाती है जिससे इस संग्रह को सार्थक पहचान मिलती है! भाषिक बुनावट की दृष्टि से भी कहानियाँ हमारे पास-पड़ोस की जटिल मनःस्थितियों को इस तरह घटित करती हैं जिससे युवाओं के अन्तःकरण का एक अनदेखा रूप जीवन के समान्तर ही धड़कता और साँस लेता दिख जाता है। अन्ततः कहानी का उद्देश्य भी यही है कि वह अपनी व्याप्ति और निष्पत्ति में हमें हमारा ही जिया हुआ जीवन वापस हमीं को सौंप देती है जिसकी आवाज़ हमें इस संग्रह में सुनाई देती है। सूर्यनाथ सिंह इस कृति में एक ज़िम्मेदार कथाकार की गहरी और समझदार पहचान बनाते नज़र आते हैं। -आनन्द कुमार सिंह

About the writer

SURYANATH SINGH

SURYANATH SINGH सूर्यनाथ सिंह का जन्म 14 जुलाई 1966, सवना, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से से शिक्षा प्राप्त की। इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं - कुछ रंग बेनूर (कहानी संग्रह), चलती चाकी (उपन्यास)। ‘शेर सिंह को मिली कहानी’, ‘बर्फ के आदमी’, ‘बिजली के खम्भों जैसे लोग’, ‘सात सूरज सत्तावन तारे’, ‘तोड़ी कसम फिर से खाई’ (सभी बाल साहित्य)। ‘आशापूर्णा देवी की श्रेष्ठ कहानियाँ’, ‘गाथा मफस्सिल’: देवेश राय, ‘खोये का गुड्डा’: अवनीन्द्रनाथ ठाकुर और ‘राजा राममोहन राय’: विजित कुमार दत्त का बांग्ला से हिन्दी अनुवाद। कुछ रचनाओं के बांग्ला, ओड़िया और पंजाबी में अनुवाद हो चुके हैं। सूर्यनाथ सिंह हिन्दी अकादमी, दिल्ली का बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान, सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय के प्रकाशन विभाग का भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से सम्मानित किये गये हैं। वर्तमान समय में जनसत्ता में वरिष्ठ सहायक सम्पादक के पद पर हैं।

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