Kayakalp

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-189-8

Author:PREMCHAND

Pages:320

MRP:Rs.425/-

Stock:In Stock

Rs.425/-

Details

कायाकल्प

Additional Information

कायाकल्प प्रेमचंद का एकमात्र उपन्यास है जिसमें चमत्कार की महिमा दिखाई गई है और पूर्वजन्म को कथा का आधार बनाया गया है। लेकिन इस उपन्यास के ज़ोरदार हिस्से वे हैं जहाँ प्रेमचंद ने हाड़-मांस के आदमियों के जीवन पर दृष्टि केंद्रित कर उनके चरित्रों की अच्छाइयों और बुराइयों का चित्रण किया है। कथाकारों ने जनता के दमन की कथा पहले भी लिखी थी। इस उपन्यास की खूबी यह है कि जनता दमन से आतंकित न हो कर उसका मुकाबला करने के लिए आगे बढ़ती है। धर्म की आड़ में होने वाले सांप्रदायिक दंगों का भी असरदार चित्रण है।

About the writer

PREMCHAND

PREMCHAND मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फारसी से हुआ और जीवनयापन का अध्यापन से। 1898 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक बने। नौकरी के साथ ही पढ़ाई जारी रखी 1910 में इंटर पास किया और 1919 में बी.ए. पास करने के बाद स्कूलों के डिप्टी सब-इंस्पेक्टर बन गए।प्रेमचंद नाम से ‘बड़े घर की बेटी’ उनकी पहली कहानी ‘जमाना’ पत्रिका के दिसंबर 1910 के अंक में प्रकाशित हुई। छह साल तक ‘माधुरी’ पत्रिका का संपादन किया; 1930 में बनारस से अपना मासिक पत्र ‘हंस’ शुरू किया और 1932 के आरंभ में ‘जागरण’ साप्‍ताहिक भी निकाला। उनकी कई कृतियों का अंगेजी, रूसी, जर्मन सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। ‘गोदान’ उनकी कालजयी रचना है। उन्होंने कुल 15 उपन्यास, 300 से अधिक कहानियाँ, 3 नाटक, 10 अनुवाद, 7 बाल-पुस्तकें तथा हजारों पृष्‍‍ठों के लेख, संपादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि लिखे। लेकिन जो यश-प्रतिष्‍‍ठा उन्हें उपन्यास और कहानियों से मिली, वह अन्य विधाओं से नहीं। मरणोपरांत उनकी कहानियाँ मानसरोवर के कई खंडों में प्रकाशित हुई। स्मृतिशेष: 8 अक्‍तूबर, 1936, बनारस में।

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