Kante Ki Baat - 1 Na Likhne Ka Karan

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-336-7

Author:ED. RAJENDRA YADAV

Pages:160


MRP : Rs. 250/-

Stock:In Stock

Rs. 250/-

Details

कांटे की बात 1 - न लिखने का कारण

Additional Information

न लिखने का कारण न लिखने का कारण को कुछ अभिधार्थियों ने लेखक की व्यक्तिगत अक्षमता का विस्तार माना था, जबकि इसका अर्थ रचना-विरोधी-माहौल के बीच 'जैनुइन लेखन' का सरोकार है। यहाँ असली मुद्दा लिखने की वजह ढूँढ़ने का है, 'कुछ' सार्थक और प्रासंगिक की तलाश का है। इस तलाश में लेखक 'मैं और दूसरे' के बीच संवाद की स्थिति बनाता है, वह खुद अपना साक्षी बनता है और दूसरे' के साथ संवेदना के गहरे स्तर पर जुड़ता है। इस प्रक्रिया में वह अपने और दूसरे के संघर्ष को 'शब्द' देता है, 'शब्द' ही भविष्यहीनता के आतंक को स्वप्न, स्मृति और विजन से तोड़ने की सामर्थ्य रखता है। अस्तित्व के बुनियादी संघर्ष में शब्द के निजी मुहावरे का अनुसन्धान कैसे किया जाए–'न लिखने का कारण' का मूल सरोकार यही है। इससे जुड़ी है-उस रचना विरोधी माहौल की पड़ताल, जिसमें व्यक्ति के जीने, सोचने, पढ़ने, बोलने और रचने पर प्रतिबन्ध लगाया जाता है, रचनाकार से लिखने के सभी कानून छीन लिए जाते हैं...

About the writer

ED. RAJENDRA YADAV

ED. RAJENDRA YADAV राजेन्द्र यादव जन्म : 28 अगस्त, 1929 शिक्षा : एम.ए. (आगरा)। प्रथम रचना : प्रतिहिंसा ('चांद' के भूतपूर्व सम्पादक श्री रामरखसिंह सहगल के मासिक 'कर्मयोगी' में) 1947 में। प्रकाशित रचनाएँ : सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), कुलटा, अनदेखे अनजाने पुल, मंत्रविद्ध (उपन्यास) देवताओं की मूर्तियाँ, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ और चौखटे तोड़ते त्रिकोण। (अब तक की तमाम कहानियाँ पड़ाव-1, पड़ाव-2 और 'यहाँ तक' शीर्षक तीन जिल्दों में संकलित) (कहानी संग्रह), आवाज़ तेरी है (कविता संग्रह) कहानी : स्वरूप और संवेदना, उपन्यास : स्वरूप और संवेदना, कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, औरों के बहाने, अठारह उपन्यास, कांटे की बात शृंखला (निबन्ध संग्रह)। 'सम्पादन : नये साहित्यकार पुस्तकमाला में मोहन राकेश, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ रेणु तथा मन्नू भंडारी की चुनी हुई कहानियाँ। एक दुनिया : समानान्तर, कथा-यात्रा, कथा-दशक, आत्मतर्पण और काली सुखियाँ (अफ्रीकी कहानियाँ)। 'अनुवाद : हमारे युग का एक नायक : लर्मेल्तोव, प्रथम प्रेम, 'वसंत प्लावन : तुर्गनेव, टक्कर : ऐन्तोन चेखव, संत 'सर्गीयस : टालस्टॉय, एक महुआ : एक मोती : स्टाइन बैक, 'अजनबी : अलबेयर कामू (छहों उपन्यास कथा-शिखर-1,2 शीर्षक से दो जिल्दों में संकलित)। निधन : 28 अक्टूबर 2013

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