Varvar Rao Ki Jail Diary

Format:Paper Back

ISBN:978-93-8991-589-1

Author:Varvar Rao, Translated by Shashi Narayan Swadheen & Nusrat Mohiuddin

Pages:134

MRP:Rs.299/-

Stock:In Stock

Rs.299/-

Details

वरवर राव, अनुवाद : शशिनारायण स्वाधीन, नुसरत मोहियोद्दीन

Additional Information

वरवर राव की भाषा क्रांति का कथानक रचती है। उन बारीक-से-बारीक स्थितियों को टोह लेती है, जिन्हें व्यवस्था ने शोषित कर गर्द में बदल दिया है। इसलिए वे एक सार्थक हस्तक्षेप करने वाले धुरी कवि हैं, जो सिर्फ़ शब्दों की जुगाली नहीं करते, और न ही उपमाओं और बिम्बों के लिए सर्कस। वे हर उस शीर्षासन के ख़िलाफ़ हैं, जो मनुष्य को उल्टे होकर देखने को विवश करती है। यही वजह है कि वरवर राव सरोकारी जनपद के कवि हैं। इसलिए वरवर राव के स्पर्श गहन अनुभूतियों के दस्तावेज़ हैं। जिन्हें सिर्फ़ भाषा और भूगोल नहीं बाँधता। वे मनुष्य के हक़ में हैं और बहु-राष्ट्रीय कंपनियों के ख़िलाफ़। उनकी आवाज़ एक प्रतिबद्ध कवि और आत्मचेता मनुष्य की आवाज़ है, जो सिर्फ़ अपने मन में फुसफुसाकर नहीं जाता, बल्कि सड़क के उस मुहाने से चीखकर बुलाता है। वह चैंकाता नहीं, आपको सन्नद्ध करता है। तेलुगु से हिंदी में इस का अनुवाद अपने दौर के दो मशहूर प्रगतिशीत लेखकों शशि नारायण स्वाधीन एवं नुसरत मोहियोद्दीन ने किया है।

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Varvar Rao, Translated by Shashi Narayan Swadheen & Nusrat Mohiuddin

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