Mela

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-70550-72-3

Author:Kishor Kumar Sinha

Pages:142


MRP : Rs. 100/-

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Details

मेला

Additional Information

भारतवर्ष मेलों का देश है। हर गाँव में, कस्बे में, शहर में, हर साल कोई-न-कोई जुलूस, तमाशा होता है। इनमें से हर एक किसी-न-किसी घटना, त्यौहार या पर्व से जुड़ा होता है। मेले लगते भी खास जगहों पर हैं। किसी मन्दिर के सामने, बाबा की कुटिया के पास, पीर के मज़ार के चारों ओर या फिर किसी तालाब या नदी के किनारे लेकिन गंगा के किनारे लगने वाले मेलों की बात ही और है। हज़ारों-लाखों गाँववासी बरबस खिंचे चले आते हैं इस नदी के तट पर। क्यों भला? क्या मिलता है गंगा तट पर? ऐसा क्या है गंगा में कि जिसकी वजह से ठंड से ठिठुरती औरतें, बच्चे, बूढ़े सभी डुबकी लगाकर नहाते हैं। शायद गंगा में पाप धोने की शक्ति है और पुण्य देने की भी। लेकिन इसे प्रदूषित करने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। आखिर कहाँ तक पाप धोयेगी गंगा! इसी प्रश्न का उत्तर खोजने की कोशिश की गयी है इस उपन्यास में।

About the writer

Kishor Kumar Sinha

Kishor Kumar Sinha किशोर कुमार सिन्हा सन् 1955 में अलीगढ़ शहर में पैदा हुए, वहीं के स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा हुई। अलीगढ़ से ही हिन्दी पत्रिकाएँ, पुस्तकें पढ़ने का सिलसिला शुरू हो गया। घर में पढ़ने-पढ़ाने का वातावरण था। वर्ष 1971 में दिल्ली विश्वविद्यालय में भौतिकी में अध्ययन प्रारंभ किया व 1976 में सेंट स्टीफेंस कॉलेज़ से एम.एस-सी. में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसी बीच हिन्दी लेखन, भौतिकी विभाग में हिन्दी संस्था का गठन भी हुआ। 1977 में भारतीय राजस्व सेवा व 1978 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्यरत हुए। हिंदी नाटक मंचन करने के अवसर प्राप्त हुए, और 1980 में सहारनपुर में नाट्य संस्था की स्थापना हुई। वर्ष 1985 में फर्रुखाबाद के जिला कलक्टर के कार्यालय में दृष्टिकोण नामक हिंदी संस्था की स्थापना की और विधिवत लेखन कार्य शुरू किया। बँधुआ मजदूरों पर आधारित प्रथम उपन्यास 'गाथा भोगनपुरी' 1986 में प्रकाशित हुआ। आगरा शहर की व्यथा लिए, दूसरा उन्यास 'बेताज शहर' वर्ष 1988 में प्रकाशित हआ। तीसरा उपन्यास, 'मेला' वर्ष 1990 में पाठकों के समक्ष आया। पहला नाटक संग्रह, 'किस्सा पंचायत राज का' वर्ष 1996 में छपा और नवीनतम नाटक संग्रह 'झंसी का किला' वर्ष 1999 में प्रकाशित किया गया है। 1977 से 2001 के सेवाकाल में विकास आयुक्त आगरा, कलक्टर फर्रुखाबाद, कलक्टर इटावा, प्रबंध निदेशक, उ.प्र. खाद्य निगम, वरिष्ठ प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, सचिव शिक्षा, सचिव पर्यावरण, आयुक्त बरेली मण्डल, सचिव वित्त विभाग आदि पदों पर कार्यरत रहे। अब सचिव चिकित्सा विभाग के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 1995 में ग्रेट ब्रिटेन से ग्राम्य विकास में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की और 1998 में मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री प्राप्त की है। हिंदी भाषा में मुहावरों के माध्यम से हास्य व्यंग्य पर पुस्तक का लेखन चल रहा है। भारतीय पक्षियों के बारे में एक डाइरेक्टरी 'ए बर्ड टोल्ड अस' प्रकाशनाधीन है। यह पुस्तक पत्नी कविता सिन्हा के साथ लिखी गई है। पस्तक के ग्राफिक्स पुत्र समर्था के हैं तथा पक्षियों की आकृतियाँ पुत्री कनिका द्वारा रेखांकित की गयी हैं। यही टीम अब नयी पुस्तक 'यू एंड योर पैट्स' पर भी कार्य कर रही है।

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