Darulshafa

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-489-9

Author:RAJKRISHAN MISHRA

Pages:352


MRP : Rs. 425/-

Stock:In Stock

Rs. 425/-

Details

दारूलशफ़ा

Additional Information

दारुलशफ़ा एक बस्ती भी हो सकती है और संस्था भी, और काल्पनिक होते हुए भी आज की ज़िन्दगी में उस जगह है जहाँ आपाधापी, हिंसा, भ्रष्टाचार, स्वार्थपरता और चापलूसी का हमारा जाना-पहचाना यथार्थ, अपने विवरण की प्रखरता के कारण, बिल्कुल अजनबी ढंग से उभरता है और हमारी सामाजिक चेतना पर हमला बोलता है। गहरी मानवीय संवेदनाओं और ठेठ किस्सागोई के दो छोरों में बंधे हिन्दी उपन्यास के संसार में ऐसी बहुत कम मध्यवर्ती कृतियाँ हैं जो सामान्य पाठक को सुपरिचित जिंदगी के बीच से ही ऐसे अनुभवों से गूँथती हों जो उसकी उदासीनता को तोड़ सकें। मुझे विश्वास है कि चिलगोजों, चमचों, चकरबंदों, खुराकियों से भरा-पूरा यह उपन्यास इन्हीं कृतियों। में एक होगा। दारुलशफ़ा आज की का असली दस्तावेज़ है। - श्रीलाल शुक्ल

About the writer

RAJKRISHAN MISHRA

RAJKRISHAN MISHRA राजकृष्ण मिश्र जन्म : 3 अगस्त, 1940 को वाराणसी में। सृजन : खलील जिब्रान और गुरुदेव टैगोर की गीतांजलि की परंपरा में 'कामना का क्षितिज' शीर्षक से रेखाचित्र (1975), उपन्यास-त्रयी काउंसिल हाउस', 'दारूलशफ़ा' और 'मंत्रिमंडल' (1996), 'हैलो' (उपन्यास-1985) और 'कुतो मनुष्यः (उपन्यास-1994), 'चालान' (नाटक1978), 'बजट' (नाटक-1996), 'आईना' (कहानी-संग्रह-1996), 'बिखराव का संकट (निबंध-संग्रह-1996) में प्रकाशित। संप्रति : 'सरस्वती' पत्रिका के पुनर्प्रकाशन और पूर्णकालिक लेखन में संलग्न। सम्मान : वर्ष 1984, 1985 में साहित्य अकादमी के लिए 'सचिवालय' (काउंसिल हाउस) नामांकित। आपकी कृतियों पर लखनऊ विश्वविद्यालय में स्वतंत्र शोधकार्य चल रहा है। पिछले डेढ़ दशक • से विभिन्न विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर पी-एच. डी., डी.लिट् के शोध ग्रंथों में उपन्यास त्रयी के शुरुआती दो खंडों को रेखांकित और उल्लेखित किया जा रहा है। संपर्क : 48, वाल्मीकि मार्ग, हजरतगंज, लखनऊ।

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